एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने शनिवार को एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गडकरी ने दिखा दिया है कि शक्ति का उपयोग प्रभावी तरीके से किस तरह किया जा सकता है। प्रतिद्वंदी पार्टियों के ये दो दिग्गज नेता अहमदनगर में एक मंच पर शिरकत करते नजर आए थे।
पवार ने कहा कि मैं इस कार्यक्रम में इसलिए आया क्योंकि मुझे बताया गया कि गडकरी अहमद नगर में कई प्रोजेक्ट का उदघाटन करने जा रहे हैं जिससे इस शहर की कई समस्याओं का समाधान होगा। साथ ही मुझे बताया गया कि गडकरी चाहते हैं कि मैं इस कार्यक्रम में शिरकत करूं।
पवार बोले- गडकरी के प्रोजेक्ट पर तुरंत शुरू होता है काम
एनसीपी सुप्रीमो ने कहा कि एक बार किसी परियोजना का शिलान्यास समारोह होने के बाद अक्सर कुछ नहीं होता है, लेकिन जब गडकरी की परियोजनाओं की बात आती है, तो समारोह के कुछ दिनों के भीतर काम शुरू हो जाता है। पवार ने कहा कि गडकरी एक बड़ा उदाहरण हैं कि कैसे एक जनप्रतिनिधि देश के विकास के लिए काम कर सकता है।
एनसीपी प्रमुख ने कहा कि मुझे याद है कि गडकरी के यह जिम्मेदारी (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय) संभालने से पहले लगभग 5,000 किमी. काम किया गया था। लेकिन उनके पदभार संभालने के बाद यह आंकड़ा 12,000 किमी. को पार कर गया है।
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री ने क्षेत्र के किसानों को सलाह दी कि गन्ने का उपयोग केवल चीनी उत्पादन तक ही सीमित नहीं रहेगा और उन्हें इसे इथेनॉल के कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर भी सोचना चाहिए।
गडकरी ने दिया मंत्री को ये सुझाव
वहीं, गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में सड़क परियोजनाओं को क्रियान्वित करते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्थानीय नदियों और नालों को भी साफ किया।
उन्होंने कहा कि मैं हसन मुश्रिफ (महाराष्ट्र ग्रामीण विकास मंत्री) को अहमदनगर जिले में जल संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करने के बारे में सोचने का सुझाव देता हूं। गडकरी ने कहा कि नदियों और तालाबों की गहराई बढ़ाने से भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलती है। एनसीपी नेता मुश्रिफ, जो इस सूखे जिले के संरक्षक मंत्री भी हैं, समारोह में उपस्थित थे।
सड़क परियोजनाओं पर दिया बड़ा बयान
इस बीच नितिन गडकरी ने एक अन्य कार्यक्रम में कहा कि देश में विदेशी पेंशन और इंश्योरेंस फंड्स की ओर से सड़क संपत्तियों की खरीद की आशंका को कम किया जा रहा है। इसके लिए मोदी सरकार ने मौद्रिकरण योजना के तहत सड़क परियोजनाओं के आकार को कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंड्स के पास बड़ी मात्रा में पूंजी होती है, जो दूसरे बाजारों में बहुत कम रिटर्न देती है। ऐसे में वे भारत में पैसा लगाते हैं। हम नहीं चाहते कि विदेशी हमारी संपत्ति के मालिक हों।