राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की 30वीं वर्षगांठ के अवसर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने कहा, हिंसा हमेशा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की 30वीं वर्षगांठ के अवसर एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। दिवस समारोह में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा ने भी गुरुवार को कार्यक्रम में शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, हिंसा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नागरिक अपने मौलिक लोकतांत्रिक अधिकारों का आनंद ले सकें, इसके लिए राज्य को हिंसा मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने चाहिए।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अरुण मिश्रा ने कहा, हमारा संविधान कई मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है, जो समानता, न्याय, स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीवन के अधिकार के सिद्धांत को दर्शाता है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) मिश्रा ने कहा, हमारे संविधान का लक्ष्य सभी के लिए न्याय है। स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका के बिना समानता हासिल नहीं की जा सकती। भारत के संविधान के अनुच्छेद 50 के तहत शक्तियों का पृथक्करण भी यही सुनिश्चित करता है।
साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मीडिया बहसों के गिरते स्तर पर अफसोस व्यक्त किया। उन्होंने कहा, सभी पक्षों की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि युवा पीढ़ी पर उनकी छाप असभ्य बहस और संवाद से न हो। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार मनुष्य की मौलिक गरिमा से समझौता करता है। भ्रष्टाचार सीधा हमारी आत्माओं पर प्रहार करता है। हमें हर उस चीज को उखाड़ फेंकना चाहिए, जो विकास में रूकावट हो।