ये दिक्कतें भी झेलनी पड़ती हैं
यहां काम करने वाली दूसरी वर्कर का कहना है, साल के दो-चार दिनों की बात न करें, तो अब यहां कुछ खास धंधा नहीं बचा है। नए साल पर यहां लोगों का हुजूम उमड़ता है। 31 दिसंबर को जीबी रोड की दुकानें जल्द बंद हो जाती है, इसलिए सात बजे के बाद यहां ग्राहक आने लगते हैं। कोठों के नीचे दुकानदारी करने वाले लाला जी भी इस दिन सहयोग करते हैं। वे अपने आप ही सात बजे या उससे पहले दुकान बंद कर चले जाते हैं। दरअसल, यही एक दिन होता है जब हर छोटा-बड़ा कोठा ग्राहकों से गुलजार रहता है। रात को तीन-चार बजे तक यहां लोगों का जमावड़ा लगता है।
दिक्क्त यह होती है कि टोली यानी समूहों में आने वाले युवक कई बार मारपीट करने लगते हैं। जबरदस्ती भी खूब होती है। नए साल के मौके पर अधिकांश युवा शराब की बोतल लेकर कोठे में आने की जिद्द करते हैं। यहीं से लड़ाई झगड़ा शुरू हो जाता है। इसी के चलते मारपीट भी होती है। समूह में आने वाले ग्राहक खासकर युवा, सेक्स वर्कर के साथ बुरा बर्ताव करते हैं। ऐसे लोग कोठे की सीढ़ियां न चढ़ने पाएं, इसके लिए हम अपने स्तर पर कुछ इंतजाम करते हैं। स्थिति जब बेकाबू होने लगती है तो पुलिस चौकी को इत्तला कर देते हैं।
लगाते हैं मध्यम आवाज वाले स्पीकर
साल के आखिरी दिन यहां आने वाले कई ग्राहकों की मांग होती है कि वे सेक्स वर्कर के साथ नाचना चाहते हैं। हालांकि अन्य दिनों में कोई ग्राहक ऐसी मांग करता है, तो उसे मना कर दिया जाता है। नववर्ष के जश्न में उनकी यह बात मान ली जाती है। इसके लिए मध्यम आवाज वाले स्पीकर लगाकर उनकी फरमाइश पूरी करते हैं। इसके लिए चार-पांच सौ रुपये अतिरिक्त लिए जाते हैं। वह माहौल ही ऐसा होता है कि नाचने वाली सेक्स वर्कर कुछ न मांगे तो भी पांच सौ रुपये तक उसे मिल जाते हैं। जीबी रोड पर जो रेट सामान्य दिनों में रहता है, वह नए साल के जश्न पर थोड़ा ज्यादा होता है।
कई बार ग्राहक अपनी खुशी से एक हजार रुपये तक दे जाते हैं, लेकिन ऐसे ग्राहक बहुत कम हैं। आम दिनों में तो बड़ी मुश्किल से 200-300 रुपये मिल पाते हैं। नए साल की मस्ती में अनेक ग्राहक अपना कीमती सामान चोरी होने की शिकायत करते हैं। कोठा संचालिका बताती हैं, जाहिर सी बात है कि इसके लिए हमें ही बदनाम किया जाता है। मैं यह नहीं कहती हूं कि हर कोठे पर सभी वर्कर अपने धंधे को लेकर ईमानदार हैं।
कई कोठों पर कुछ सेक्स वर्कर अपने कारिंदों के साथ मिलकर ऐसी हरकत कर देती हैं। जब समूह में लोग कोठे पर आते हैं तो सीढ़ियों के आसपास जेब कतरे या झपटमार भी खड़े रहते हैं। कई कोठों तक पहुंचने का रास्ता अंधेरे या फिर बहुत मध्यम रोशनी से होकर गुजरता है। जब कोई ग्राहक नशे में होता है तो वह छीना-झपटी का शिकार बन जाता है।