पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम और असम के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पिछली बैठक नवंबर 2022 में गुवाहाटी में हुई थी। शुक्रवार को हुई बैठक में असम के प्रतिनिधिमंडल में सीमा सुरक्षा और विकास मंत्री अतुल बोरा और मिजोरम से गृहमंत्री के सपदांगा ने भाग लिया।
मिजोरम असम के बीच लंबे समय से चल रहे आ रहे सीमा विवाद को लेकर दोनों राज्यों के मंत्रियों ने वार्ता की। इस दौरान विवाद को दूर करने के मिलकर काम करने पर सहमति बनी। दोनों राज्यों के प्रतिनिधिमंडल के बीच आइजोल में हुई बैठक में तमाम मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए गए।
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पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम और असम के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पिछली बैठक नवंबर 2022 में गुवाहाटी में हुई थी। शुक्रवार को हुई बैठक में असम के प्रतिनिधिमंडल में सीमा सुरक्षा और विकास मंत्री अतुल बोरा और मिजोरम से गृहमंत्री के सपदांगा ने भाग लिया। अगस्त 2021 में के बाद दोनों राज्यों के बीच चौथी बार और जोरम पीपुल्स मूवमेंट के दिसंबर में सत्ता में आने के बाद यह पहली वार्ता हुई थी।
मिजोरम और असम के बीच काफी समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। मिजोरम के तीन जिले आइजोल, कोलासिब और ममित, असम के कछार, कर्मगंज और हैलनकांडी जिलों के साथ 164.6 किमी लंबी सीमा साझा करते हैं। दोनों राज्य 1875 और 1933 के सीमांकन के आधार पर सीमा को लेकर अपनी-अपनी बात कहते हैं। मिजोरम की ओर से दावा किया जाता है कि 1875 में अधिसूचित बंगाल पूर्वी फ्रंटियर रेगुलेशन 1873 के तहत साल 1875 में तय की गई इनर लाइन के तहत आरक्षित वन का 509 वर्ग मील का क्षेत्र उनके हिस्से में आता है।
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वहीं असम का कहना है कि 1933 में हुए सर्वे के आधार पर बने मानचित्र में वन क्षेत्र को असम के हिस्से में दिखाया गया है। हालांकि दोनों राज्यों के बीच कोई जमीनी सीमांकन नहीं है। दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद एक पुराना और पेचीदा मुद्दा है जो दशकों तक अनसुलझा रहा। सीमा विवाद 26 जुलाई, 2021 को बढ़ गया जब दोनों राज्यों के पुलिस बलों में टकराव हुआ, जिससे असम के छह पुलिसकर्मियों और एक नागरिक की मौत हो गई थी।