जर्मनी और भारत की हरित और सतत विकास भागीदारी एक दीर्घकालीन साझेदारी है। चांसलर ओलाफ शोल्ज जब अक्तूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे, तो इसमें हुई प्रगति का जायजा लेंगे। तब इसके बहुत अच्छे नतीजे सामने आएंगे। राजदूत फिलिप एकरमैन में शुक्रवार को यह बात कही।
नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास में गुरुवार राजदूत एकरमैन ने गुरुवार को पीटीआई को एक इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत और जर्मनी के बीच गहरी मित्रता और निकटता को दर्शाती है।
शोल्ज और मोदी ने मई 2022 में दोनों देशों के बीच हरित एवं सतत विकास भागीदारी (जीएसडीपी) समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता सतत विकास के लिए 2030 तक का एजेंडा और पेरिस समझौते के उद्देश्यों की दिशा में दोनों देशों के बीच सहयोग को गति देता है।
एकरमैन ने कहा, भारत और जर्मनी ने हरित और सतत विकास के लिए साझेदारी बढ़ाई है। यह साझेदारी जलवायु परिवर्तन, स्मार्ट सिटी योजना और जैव विविधता के कई पहलुओं को कवर कर रही है। उन्होंने कहा, 'यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण साझेदारी है, जिसके लिए अच्छी तरह से वित्त पोषण हुआ है और जो भारत व जर्मनी के बीच गहरी और करीबी दोस्ती को दर्शाता है।'
राजदूत ने कहा कि बीते दो वर्षों के दौरान साझेदारी में प्रगति अच्छी रही है। उन्होंने कहा, प्रगति अच्छी रही है। हमारे पास वर्षों से कई अलग-अलग परियोजनाएं हैं। हर साल हम नई परियोजनाओं की पहचान करते हैं और उनको पूरा करते हैं। इसलिए जब 25 अक्तूबर को चांसलर, प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठेंगे तो प्रगति का जायजा लेंगे। हमें इस साझेदारी के बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे।
यह पूछे जाने पर कि क्या शोल्ज 25 अक्तूबर को यहां आ रहे हैं, उन्होंने कहा, यह योजना है। वह अक्तूबर के दूसरे पखवाड़े में आ रहे हैं। चांसलर 2024 में दिल्ली में होने वाले अंतर-सरकारी परामर्श की बैठक के लिए यहां आएंगे। जून में एकरमैन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि शोल्ज की यात्रा की तारीख को अंतिम रूप दिया जा रहा है।