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सात राज्यों के वे मुख्यमंत्री, जो करोड़पति होकर भी खुद टैक्स नहीं भरते

Thu, 19 Sep 2019 04:15 PM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरकारी खजाने से भरा जाता रहा इन मुख्यमंत्रियों का टैक्स - फोटो : अमर उजाला
सात राज्यों ने अपने मंत्रियों को इतना गरीब समझा था कि वे अपना आयकर भर पाने लायक नहीं हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश और पंजाब शामिल है। मार्च 2018 में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अधिनियम में संशोधन कर यह व्यवस्था खत्म कर दी।

पंजाब को छोड़ कर अन्य छह राज्यों में मौजूदा मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के आयकर का बोझ सरकारी खजाने पर पड़ता है। कई दशकों से इन राज्यों में मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों का टैक्स सरकारी खजाने से भरा जाता है। फिलहाल नजर डालते हैं पिछले तीन बार के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति पर:
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उत्तर प्रदेश

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VP Singh - फोटो : PTI
उत्तर प्रदेश में सरकारी खजाने से साल 1981 के बाद से ही सभी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों का आयकर भरा जा रहा है। ऐसा तब से हो रहा है जब से यूपी के मंत्रियों के वेतन, भत्ते और विविध अधिनियम, 1981 को पास किया गया था। इसे विश्वनाथ प्रताप सिंह के कार्यकाल के दौरान इस आधार पर पारित किया गया था कि मंत्री 'गरीब' हैं और अपनी कम आय से आयकर का भुगतान नहीं कर सकते हैं। इसके बाद से यह व्यवस्था बनी हुई है।
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मायावती और अखिलेश यादव

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अखिलेश यादव-मायावती (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
साल 2004 में बसपा प्रमुख मायावती मुख्यमंत्री बनीं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, तब मायावती की संपत्ति छह करोड़ से ज्यादा की थी। वहीं 2009 में समाजवादी पार्टी की जीत के बाद अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बनें, जिनकी संपत्ति तब चार करोड़ आंकी गई थी।

योगी आदित्यनाथ

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
साल 2014 में भाजपा ने सपा और बसपा को किनारे लगाते हुए अप्रत्याशित जीत हासिल की और योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें। सीएम योगी की संपत्ति 2014 लोकसभा चुनाव के समय 71 लाख से ज्यादा बताई गई।
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मध्यप्रदेश

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शिवराज सिंह चौहान- कमलनाथ - फोटो : Instagram
मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान तीन कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहे। 2005 से लेकर 2018 तक सालों में उन्होंने अपना आयकर अपने पैसों से नहीं भरा, जबकि उनकी संपत्ति 2008 मेें उनकी संपत्ति एक करोड़ थी, जबकि 2013 में यह बढ़कर छह करोड़ हो गई। 
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छत्तीसगढ़

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रमन सिंह-भूपेश बघेल - फोटो : Facebook
छत्तीसगढ़ में 2008 से 2018 तक भाजपा सत्ता में रही। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की संपत्ति 2008 में एक करोड़ से ज्यादा थी, जबकि 2013 में उनकी संपत्ति पांच करोड़ हो गई। वहीं, 2018 में कांग्रेस की जीत के बाद भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बनें, जिनकी संपत्ति 23 करोड़ से ज्यादा है। इन नेताओं का इनकम टैक्स भी सरकारी खजाने से भरा जाता रहा है।
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हिमाचल प्रदेश

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jairam thakur - फोटो : अमर उजाला
पंजाब से अलग होने के बाद हिमाचल प्रदेश में साल 1966 के बाद से ऐसी व्यवस्था बनी हुई है कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों का टैक्स सरकारी खजाने से भरा जाता रहा है। यहां 2007 में 96 लाख की संपत्ति के मालिक भाजपा के प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री बनें। 2012 में कांग्रेस की जीत के बाद वीरभद्र सिंह सीएम हुए, जिनकी संपत्ति 33 करोड़ से ज्यादा थी। वहीं 2017 में सीएम बने भाजपा के जय राम ठाकुर की संपत्ति तीन करोड़ से ज्यादा है। इसके बावजूद ये नेता अपना टैक्स भर पाने के मामले में 'गरीब' रहे। 

उत्तराखंड

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त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला
उत्तराखंड में 2009 में एक करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक विजय बहुगुणा मुख्यमंत्री बने, जबकि 2017 में छह करोड़ की संपत्ति के मालिक हरीश चंद्र रावत मुख्यमंत्री बने। 2017 से यहां कांग्रेस की हार हुई और भाजपा के त्रिवेंद्र सिंह रावत सीएम बनें। त्रिवेंद्र भी एक  करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैं। यहां कांग्रेस भी सत्ता में रही और भाजपा भी। बावजूद इसके किसी भी सीएम ने इस अधिनियम में संशोधन नहीं किया।

हरियाणा

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मनोहर लाल खट्टर (फाइल)
हरियाणा में 2005 में छह करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक ओमप्रकाश सिंह चौटाला सीएम बने। 2014 में कांग्रेस की सरकार बनी और तीन करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक भूपिंदर सिंह हुड्डा सीएम बने। साल 2014 से भाजपा के मनोहर लाल खट्टर सीएम हैं, जोकि 61 लाख से ज्यादा की संपत्ति के मालिक हैं। इन लाखपति-करोड़पति मुख्यमंत्रियों का आयकर भी सरकारी खजाने से भरा जाता रहा है। 
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पंजाब

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पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में सरकारी खजाने से 18 मार्च, 2018 तक ही मुख्यमंत्री और मंत्रियों के वेतन, भत्ते और विभिन्न भत्तों पर कर का भुगतान किया गया था। ऐसा इसलिए क्योंकि बाद में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पूर्वी पंजाब के मंत्रियों के वेतन अधिनियम, 1947 में संशोधन करके इस प्रथा को बंद कर दिया। इससे पहले 2017 में सीएम बने कैप्टर अमरिंदर सिंह 48 करोड़ से ज्यादा संपत्ति के मालिक हो चुके थे, जबकि 2007 में सीएम बनने के समय उनकी संपत्ति 38 करोड़ की थी। 2012 में सीएम बने प्रकाश सिंह बादल की संपत्ति भी छह करोड़ से ज्यादा की थी। उनके पूर्व के मुख्यमंत्रियों के टैक्स भी सरकारी खजाने से भरे जाते थे। 
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