सात राज्यों ने अपने मंत्रियों को इतना गरीब समझा था कि वे अपना आयकर भर पाने लायक नहीं हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश और पंजाब शामिल है। मार्च 2018 में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अधिनियम में संशोधन कर यह व्यवस्था खत्म कर दी।
पंजाब को छोड़ कर अन्य छह राज्यों में मौजूदा मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के आयकर का बोझ सरकारी खजाने पर पड़ता है। कई दशकों से इन राज्यों में मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों का टैक्स सरकारी खजाने से भरा जाता है। फिलहाल नजर डालते हैं पिछले तीन बार के मुख्यमंत्रियों की संपत्ति पर: