चीफ जस्टिस रमण ने वेणुगोपाल से कहा, सदस्यों की नियुक्ति ही समाधान है। इस पर अटॉर्नी जनरल ने आश्वासन दिया कि नियुक्तियां दो हफ्ते में की जाएंगी और नियुक्तियां न होने पर ठोस कारण बताया जाएगा। मामले को स्थगित करते हुए सीजेआई ने कहा कि हम दो हफ्ते की मोहलत दे रहे हैं। नियुक्तियों की व्यापक योजना के साथ आइए।
हमारे प्रयास व्यर्थ जा रहे
चीफ जस्टिस रमण ने कहा, जिस तरह से निर्णय लिए जा रहे हैं, उससे हम बहुत नाखुश हैं। हम चयन करते हैं और सरकार कहती है कि हम उन्हें नहीं चुन सकते। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जज कोरोना के दौरान देशभर में गए और नामों को चुना लेकिन हमारे प्रयास व्यर्थ जा रहे हैं। यह सिर्फ हमारे समय की बर्बादी है।
चीफ जस्टिस ने कहा, न्यायिक सदस्यों को प्रभावी रूप से केवल एक वर्ष का कार्यकाल मिलेगा। दो साल तक चयन लंबित रखे। नियुक्ति आदेश अब जारी हुए हैं, जब जजों की उम्र 64 वर्ष है। 65 वर्ष में सेवानिवृत्ति से पहले सिर्फ एक वर्ष का कार्यकाल बचा है। उन्होंने सवाल किया, कौन सा जज एक साल के लिए इस नौकरी में जाना चाहेगा।
सरकार ने कहा, सिफारिश न मानना हमारा अधिकार
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि यह सरकार का अधिकार है कि वह सिफारिश माने या न माने। उन्होंने मौजूदा न्यायाधिकरण सुधार कानून 2021 का भी हवाला दिया। इस पर सीजेआई ने कहा, हम कानून के शासन का पालन कर रहे हैं। यदि सरकार को ही अंतिम फैसला करना है तो प्रक्रिया की शुचिता क्या है? हमने समाधान दिया, इसे लागू आपको करना है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बीआर गवई की तीन सदस्यीय पीठ ने ओडिशा प्रशासनिक न्यायाधिकरण को समाप्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर कार्मिक, सार्वजनिक शिकायतें एवं पेंशन मंत्रालय, ओडिशा सरकार व अन्य को नोटिस जारी किया है। इन सभी से आठ हफ्ते के अंदर जवाब देने को कहा है। ओडिशा हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण समाप्त करने को सही ठहराया था। ओडिशा प्रशासनिक न्यायाधिकरण बार एसोसिएशन ने इस आदेश के खिलाफ अपील दायर की है।
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने आईटीएटी और एनसीएलटी समेत छह न्यायाधिकरणों में 84 नियुक्तियां की हैं और अब चयन समिति की कोई भी सिफारिश लंबित नहीं है।
- राजस्व निदेशक अरविंद शरण द्वारा दायर हलफनामे में कहा है कि केंद्र ने एससीएससी द्वारा की गई सभी सिफारिशों पर कार्रवाई की है और नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं।
- आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी), राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी), टेलीकॉम विवाद एवं निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण (टीडीएसएटी), राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी), विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) और सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) में की गई नियुक्तियों के संदर्भ में सरकार ने चार्ट भी पेश किया।
- हलफनामे के अनुसार, वर्ष 2020 और 2021 में विभिन्न न्यायाधिकरणों में कुल 84 नियुक्तियां की गईं। हलफनामे में सबसे पहले एनसीएलटी के लिए सिफारिशों व नियुक्तियां का जिक्र किया गया। ब्यूरो