संघ प्रमुख भागवत हिंगोली जिले के नरसी में 13वीं सदी के संत नामदेव की जन्मस्थली भी गए। संघ प्रमुख ने इस मौके पर कहा, संत नामदेव ने लोगों को सरल भाषा में धार्मिक जीवन जीने की शिक्षा दी। उन्होंने वारकरी (भगवान विट्ठल) श्रद्धालुओं के संदेश को पंजाब तक पहुंचाया। यह हिंदू समुदाय की शांतिप्रियता और भाईचारे को दर्शाता है। पंजाब के लोगों ने आसानी से संत नामदेव को अपनाया।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि देश की समग्र क्षमता का आधार आध्यात्मिक शक्ति पर निर्भर है और सांधु-संतों ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाने में अपना महती योगदान दिया है।
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सांधु-संतों के योगदान की सराहना की
इससे पहले भागवत हिंगोली जिले के नरसी में 13वीं सदी के संत नामदेव की जन्मस्थली गए। संघ प्रमुख ने इस मौके पर कहा, संत नामदेव ने लोगों को सरल भाषा में धार्मिक जीवन जीने की शिक्षा दी। उन्होंने वारकरी (भगवान विट्ठल) श्रद्धालुओं के संदेश को पंजाब तक पहुंचाया।
यह हिंदू समुदाय की शांतिप्रियता और भाईचारे को दर्शाता है। पंजाब के लोगों ने आसानी से संत नामदेव को अपनाया। नामदेव के 61 पद गुरुग्रंथ साहिब में शामिल हैं। श्री गुरु नानक देव जी और गुरु गोविंद सिंह जी ने हमेशा संत नामदेव को सम्मान का स्थान दिया।
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संघ प्रमुख बृहस्पतिवार को औरंगाबाद पहुंचेंगे, वहां 14 नवंबर तक वे विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगे। संघ प्रमुख का उसके बाद हैदराबाद होते हुए 15 नवंबर को कोलकाता पहुंचने का कार्यक्रम है।