ठाणे में ही शिवसेना कर रही थी कमजोर
शिंदे के शहरी विकास मंत्रालय में शिवसेना के ही दो मंत्री लगातार हस्तक्षेप कर रहे थे। आलम यह था कि वे अपने जिले, ठाणे में कोई अधिकारी तक भी नहीं बदलवा पा रहे थे। उनके विभाग से कोई भी फाइल बिना सीएम की इजाजत के आगे नहीं बढ़ने दी जा रही थी। सीएमओ से इसके साफ निर्देश विभाग सचिव को दिए गए थे। खुद को नजरअंदाज होता देख अप्रैल में शिंदे समेत खांटी मराठा विधायक लामबंद होना शुरू हुए। उन्होंने उद्धव के कार्यक्रमों का भी बहिष्कार शुरू कर दिया।