दरअसल, शिवकुमार और शारण्या ने अपनी भाभी सत्या के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी और अपनी बच्ची को वापस लौटाने की मांग कर रहे थे। दंपती ने बच्ची को 2012 में अपनी भाभी को गोद दिया था।
मद्रास हाईकोर्ट ने गोद गई तीन महीने की बच्ची को दस साल बाद वापस लेने की मां की मांग ठुकरा दी। अदालत ने कहा कि पालने वाली मां से बच्ची को अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने हालांकि बच्ची के माता-पिता और उसके भाई-बहनों को हर सप्ताहांत पर उससे मिलने की इजाजत दे दी।
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जस्टिस पीएन प्रकाश और आर हेमालथा की पीठ ने कहा, बच्ची को जन्म देने वाली मां ने उसे तब अपनी भाभी को गोद दिया था, जब वह महज तीन माह की थी। पीठ ने इसके साथ ही बाल कल्याण कमेटी, सालेम के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें बच्ची को स्थानीय केयर होम में रखने को कहा गया था।
दंपती ने बच्ची को 2012 में अपनी भाभी को गोद दिया था
पीठ ने कहा कि बच्ची उसी महिला के पास रहेगी, जिसने उसे उसे गोद लिया। जो महिला मां की तरह दस साल से बच्ची की देखभाल कर रही है, हम उससे बच्ची को अलग नहीं कर सकते। दरअसल, शिवकुमार और शारण्या ने अपनी भाभी सत्या के खिलाफ पुलिस में शिकायत की थी और अपनी बच्ची को वापस लौटाने की मांग कर रहे थे। दंपती ने बच्ची को 2012 में अपनी भाभी को गोद दिया था।