लोकसभा चुनाव शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में पार्टियों के नेताओं की अदला-बदली जारी है। जबकि राजनीतिक दलों के टूटने और नए गठबंधन बनने का सिलसिला भी बरकरार है। इन सबके बीच महाराष्ट्र की राजनीतिक बड़ी दिलचस्प हो गई है। यहां आगामी लोकसभा चुनावों के लिए जब चारों ओर नजर दौड़ाएंगे तो एक अलग ही समीकरण देखने को मिलेगा। जो पहले प्रतिद्वंद्वी थे वो अब सहयोगी बन गए हैं। वहीं दोस्त दुश्मन बन गए हैं।
अमित शाह की रैली में दिखा बदलता समीकरण
इसका एक बड़ा उदाहरण आपको गुरुवार को नादेड़ में देखने को मिला। यहां केंद्रीय मंत्री अमित शाह की रैली के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण और भाजपा के उम्मीदवार प्रताप पाटिल चिखलीकर ने मंच साझा किया था। दरअसल, अविभाजित शिवसेना के लातूर जिले के लोहा से विधायक चिखलीकर 2019 में भाजपा में शामिल हो गए थे और नांदेड़ से कांग्रेस के मौजूदा सांसद अशोक चव्हाण को लोकसभा चुनाव में हराने में सफल रहे थे। मोदी ने तब एक प्रचार रैली में आदर्श सोसाइटी घोटाले को लेकर चव्हाण पर निशाना साधा था, जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चव्हाण को नेता नहीं बल्कि डीलर कहा था।
इस साल फरवरी में चव्हाड ने भाजपा का हाथ थाम लिया था और पार्टी के राज्यसभा सांसद बन गए। वह अब मराठवाड़ा क्षेत्र में चिखलीकर और अन्य भाजपा उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे हैं।
अजित पवार कर रहे बारणे का समर्थन
शिवसेना के श्रीरंग बारणे ने साल 2019 में मावल लोकसभा क्षेत्र में एनसीपी नेता अजित पवार के बेटे पार्थ पवार को हराया था। यह पहली बार था जब शरद पवार के परिवार के किसी सदस्य ने चुनावी हार का स्वाद चखा था। वहीं, अब यह समीकरण काफी बदल गए हैं। साल 2024 में अजित पवार बारणे के लिए प्रचार कर रहे हैं। बता दें, अजित अपने चाचा से रिश्ता तोड़ पिछले साल भाजपा में शामिल हो गए थे। वहीं, बारणे ने शिवसेना के बंटवारे के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का साथ चुना। अजित पवार अब राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं।
शिवसेना में भी उठापटक
कहा जाता है कि अजित पवार ने अमोल कोल्हे, जो उस समय अविभाजित शिवसेना के थे, को एनसीपी में शामिल होने और 2019 में शिरूर लोकसभा क्षेत्र में शिवसेना के मौजूदा सांसद शिवाजीराव अधलराव-पाटिल के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए राजी किया था। कोल्हे ने अधलराव-पाटिल को हराया।
कोल्हे अब शरदचंद्र पावर के नेतृत्व वाली एनसीपीएसपी में शामिल हो गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा-शिवसेना-एनसीपी 'महायुति' गठबंधन के सीट बंटवारे के समझौते में शिरूर सीट अजित पवार के खाते में गई और कोल्हे को हराने के इरादे से उन्होंने अधलराव पाटिल को एनसीपी में शामिल कर लिया। अब अजित पवार अपने पूर्व शिष्य कोल्हे के खिलाफ प्रचार करेंगे।
मुंबई दक्षिण-मध्य निर्वाचन क्षेत्र में, अविभाजित शिवसेना के दो बार के सांसद राहुल शेवाले को शिवसेना (यूबीटी) के अनिल देसाई के खिलाफ खड़ा किया गया है। शेवाले 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। उद्धव ठाकरे के करीबी देसाई अपने पूर्व सहयोगी के खिलाफ पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं।
अब नया मोड़ यह है कि देसाई का मुंबई कांग्रेस की प्रमुख वर्षा गायकवाड़ समर्थन करेंगी। वर्षा के पिता दिवंगत एकनाथ गायकवाड़ को साल 2014 के लोकसभा चुनाव में शेवाले ने हराया था।
बारामती सीट को लेकर पवार परिवार में कलह
वहीं, बारामती में पवार परिवार के दो सदस्य आमने-सामने हैं। अजित पवार अतीत में अपनी चचेरी बहन सुप्रिया सुले के चुनाव अभियानों का प्रबंधन करते थे। अब उनके नेतृत्व वाली एनसीपी ने तीन बार की सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ सुनेत्रा पवार को मैदान में उतारा है। सुनेत्रा अजित पवार की पत्नी हैं। इस लड़ाई ने अजित के परिवार में भी दरार डाल दी है क्योंकि उनके छोटे भाई श्रीनिवास और उनका परिवार सुले के समर्थन में आगे आए हैं।
बीड सीट पर भी बदले समीकरण
भाजपा ने बीड सीट से मौजूदा सांसद प्रीतम मुंडे की जगह उनकी बड़ी बहन एवं राज्य की पूर्व मंत्री पंकजा मुंडे को उम्मीदवार बनाया है। पंकजा को 2019 के विधानसभा चुनावों में उनके चचेरे भाई और एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने हराया था। धनंजय मुंडे अब अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में हैं और वह सत्तारूढ़ गठबंधन की उम्मीदवार पंकजा के लिए प्रचार करेंगे।
तटीय रायगढ़ में, एनसीपी के सुनील तटकरे ने 2019 में शिवसेना के लंबे समय से सांसद अनंत गीते को मामूली अंतर से हराया था। कांग्रेस ने तब तटकरे का समर्थन किया था क्योंकि उसका शरद पवार की पार्टी के साथ गठबंधन था। अब तटकरे ने अजित पवार का हाथ थाम लिया है। जबकि गीते अभी भी उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना के साथ हैं। ठाकरे के साथ कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) हैं।
शिवसेना और एनसीपी में फूट डलने से पहले दोनों पारिवारिक पार्टियां थीं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार प्रकाश अकोलकर ने कहा, 'अब चुनाव महाभारत की लड़ाई में बदल गए हैं। परिवार के सदस्य एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, वे पूर्व दुश्मनों की भी मदद कर रहे हैं।'