अन्य पिछड़ वर्ग
उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग करीब 41-43 फीसदी है। सबसे बड़ी 10 प्रतिशत की आबादी यादव,4-5 प्रतिशत कुर्मी, 4-5 प्रतिशत मौर्य, 3-4 प्रतिशत लोधी की है। राजभर समेत अन्य 21 प्रतिशत छोटी-छोटी जातियां हैं। साक्षी महाराज से कल्याण सिंह की मौजूदगी भाजपा को लोध मतों को दिलाती है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, स्वामी प्रसाद मौर्य समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कुर्मी को अनुप्रिया पटेल का अपना दल बांधे रखता है। वहीं यादव समेत अन्य का करीब-करीब एक मुश्त वोट समाजवादी पार्टी के पाले में जाता रहा है। भाजपा ने 2014 के बाद 2017 में सामाजिक समीकरण को ठीक करके इसमें भी बड़ी सेंध लगा दी थी। इस बार इस समीकरण को साधना भी एक चुनौती है।
अनुसूचित जाति, जनजाति
उत्तर प्रदेश में यह संख्या 22-23 प्रतिशत है। बसपा की मायावती अपना दावा अब 25 प्रतिशत वोटों तक कर लेती है। इसमें 14-15 प्रतिशत जाटव, आठ प्रतिशत गैर जाटव हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुछ सेंध इधर भी लगाया था। इस बार यह राह भी थोड़ा मुश्किल भरी लग रही है। हालांकि भाजपा के पास इन सबको बांधे रखने के लिए मजबूत तर्क हैं। बाल्मिकी समाज के सफाई कर्मियों का प्रधानमंत्री द्वारा संगम तट पर पैर धोना इसी कड़ी में देखा जा रहा है।
अल्पसंख्यक
17-18 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतदाता हैं। रामपुर से मुख्तार अब्बास नकवी भाजपा सांसद रह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी छवि में थोड़ा सॉफ्ट कार्नर दिखाया है, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि अल्पसंख्यक समाज को छकाती है। मोदी सरकार का नारा सबका साथ, सबका विकास है। हालांकि भाजपा के कुछ बड़े नेता नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं कि वह अल्पसंख्यकों के वोट को हटाकर अपने सफलता की सीढ़ी बनाते हैं।