सोनिया गांधी के बिना विपक्षी एकता कैसी होगी? क्या विपक्ष इसके लिए तैयार है? क्या दिग्गज नेताओं के पैमाने पर राहुल गांधी खरे उतर पाएंगे? ऐसे ही कई सवालों के जवाब जानने के लिए अमर उजाला आपके लिए लेकर आया है भाजपा बनाम विपक्ष पर सबसे बड़ी चर्चा।
इस चर्चा के लिए देश के जाने-माने पत्रकार सुमित अवस्थी, विनोद अग्निहोत्री, मेघा प्रसाद, हर्षवर्धन त्रिपाठी और मिहिर रंजन अमर उजाला के मंच पर हैं, जहां 2024 के चुनावी महासमर में विपक्ष की तैयारियों पर सबसे बड़ी चर्चा होगी।
मेघा प्रसाद
नीतीश कुमार ने कुछ दिन पहले कहा कि मैं तैयार हूं, लेकिन इंतजार कर रहा हूं, जब हम 2024 में मिलकर चुनाव लड़ें। हालांकि, ममता बनजी की पार्टी कांग्रेस के साथ नहीं जाना चाहती। नीतीश कुमार खुद विपक्ष के सबसे बड़े नेता बनना चाहते हैं। क्या ये सारे नेता कांग्रेस के नेतृत्व में महागठबंधन को स्वीकार कर पाएंगे?
विनोद अग्निहोत्री
1977 में विपक्ष में जेल में पड़े नेता एकजुट होने को तैयार नहीं थे। चुनाव से दो महीने पहले चौधरी देवीलाल ने एक जनसभा में वीपी सिंह को अपना नेता घोषित किया। 1996 में जो संयुक्त मोर्चे का गठबंधन चुनाव के बाद बना। 2004 में यूपीए लोकसभा चुनाव के बाद ही बना। 2014 में जब नरेंद्र मोदी सत्ता में आते हुए दिखाई पड़े, तब रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा उनके साथ चले गए, जो उन्हें इससे पहले तक कोस रहे थे।
हर्षवर्धन त्रिपाठी
राजनीति में अपनी ताकत बनाती होती है। अखाड़े में पहलवान खड़ा तो हो पहले। कांग्रेस को किसी विपक्षी एकता की जरूरत नहीं है, उसे अपना शरीर ठीक करना है। कांग्रेस में साख का बड़ा संकट है। भारत जोड़ो यात्रा 3500 किलोमीटर चली। वह शुरू हुई विवेकानंद केंद्र से, जिसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रचारक एकनाथ रानडे ने बनाया था। यात्रा खत्म हुई श्रीनगर के लाल चौक पर, जहां अनुच्छेद 370 खत्म हुआ। वहां पर राहुल गांधी स्कीइंग कर रहे हैं। अब इससे बेहतर नरेंद्र मोदी का प्रचार क्या हो सकता है?
मिहिर रंजन
मिहिर रंजन ने कहा कि सरकार और बाजार भावनाओं के आधार पर चलते हैं। जिस तरह भावनाओं के आधार पर किसी कंपनी के शेयर में भारी उतार-चढ़ाव आ जाता है, उसी तरह एक छोटे से मुद्दे पर भी अगर जनता की भावनाएं खिलाफ हो जाएं तो सरकार गिर जाती है। अपनी बात को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से कनेक्ट करते हुए मिहिर रंजन ने कहा कि इस यात्रा से राहुल गांधी की निजी सोच का विकास हो सकता है लेकिन उन्हें सरकार को चुनौती देने के लिए विपक्ष जोड़ो यात्रा भी करनी चाहिए। 2019 के चुनाव में भाजपा को 37 प्रतिशत वोट मिले थे और कांग्रेस को 19 प्रतिशत। ऐसे में राहुल गांधी को अगर सरकार को चुनौती देनी है तो उन्हें अपने वोट प्रतिशत को 38 प्रतिशत तक लेकर जाना होगा, तभी कुछ बात बन सकती है और इसके लिए राहुल गांधी को विपक्ष को एकजुट करना होगा।
सुमित अवस्थी
विपक्षी एकता को लेकर सुमित अवस्थी ने एक दिलचस्प सवाल उठाया और इस पर बाकी विशेषज्ञों के विचार भी जाने। सवाल ये था कि क्या राहुल गांधी विपक्ष को एकजुट करने के लिए खुद को नेता की रेस से बाहर करने का एलान करते हैं और सभी को बातचीत के लिए एकजुट करने की पहल करते हैं? साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि विभिन्न सर्वे और अध्ययनों में यह साफ हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी अभी भी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और उनकी लोकप्रियता में कतई कमी नहीं आई है। राहुल गांधी की लोकप्रियता भी एक-दो प्रतिशत बढ़ी है लेकिन अभी भी प्रधानमंत्री और उनके बीच लंबा फासला है।