योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया और सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख श्री श्री स्वामी चिदानन्द गिरि भारत यात्रा पर है। रविवार यानी 26 फरवरी को स्वामी चिदानन्द गिरि की अध्यक्षता में नोएडा में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस सत्संग कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योगदा सत्संग सोसाइटी के अनुयायी शिरकत करेंगे। साथ ही दुनिया भर में फैले अनुयायी वर्चुअल तरीके से इस सत्संग कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं। आध्यात्म संगम के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण वाईएसएस की वेबसाइट yssi.org/Sangam2023 पर देख सकेंगे।
नोएडा के सेक्टर 62 स्थित आश्रम में सत्संग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। रविवार को सुबह 10.30 बजे से लेकर 12 बजे तक स्वामी चिदानन्द गिरि का व्याख्यान होगा। इससे पहले स्वामी चिदानन्द गिरि ने 12 से 16 फरवरी को हैदराबाद में एक विशेष पांच दिवसीय आध्यात्मिक संगम की अध्यक्षता की। इस संगम में समूह ध्यान और श्री श्री परमहंस योगानन्दीजी की आदर्श जीवन शिक्षाओं पर आधारित व्याख्यान आयोजित किए गए। इनके अलावा रांची, दक्षिणेश्वर में भी सत्संग संगम का आयोजन किया जाएगा।
श्री श्री परमहंस योगानन्द द्वारा 100 साल पूर्व योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया और सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप की स्थापना की गई थी। मौजूदा समय में स्वामी चिदानन्द गिरि इस संस्था के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख हैं। स्वामी चिदानन्द 40 से भी ज्यादा सालों से वाईएसएस और एसआरएफ के संन्यासी रहे हैं। स्वामी जी संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूरोप और भारत में स्वामी योगानन्दजी की शिक्षाओं पर व्याख्यान दे चुके हैं और स्वामी योगानन्दजी की शिक्षाओं को पूरी दुनिया में प्रसार कर रहे हैं।
साल 1970 के दशक के शुरुआती सालों में जब स्वामी चिदानन्दजी अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र और दर्शनशास्त्र की पढ़ाई कर रहे थे। उसी दौरान एनसीनीट्स, कैलिफोर्निया में उनका संपर्क स्वामी योगानन्दजी की शिक्षाओं से हुआ। इसके बाद उन्होंने स्वामी योगानन्द द्वारा लिखित किताब योगी कथामृत पढ़ी। वह इस किताब से इतना प्रभावित हुए कि वह 1977 में एनसीनीटस में सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप के तहत संन्यासी बन गए।
स्वामी चिदानन्द गिरि ने इससे पहले साल 2019, 2017 और 2007 में भी भारत की यात्राएं की हैं। 2019 की पिछली यात्रा में भी स्वामी चिदानन्द गिरि ने नोएडा, मुंबई, हैदराबाद, रांची और दक्षिणेश्वर में सत्संग संगम का आयोजन किया था, जिनमें हजारों लोगों ने भाग लिया था। परमहंस योगानंद द्वारा लिखित पुस्तक योगी कथामृत दुनिया की सर्वाधिक प्रसिद्ध आध्यात्मिक पुस्तकों में से एक है। इस किताब को प्रकाशित हुए 75 साल हो गए हैं और अब तक इस किताब का 14 भारतीय भाषाओं में और कुल 50 से ज्यादा भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।