लोकसभा 2019 के चुनाव खत्म हो चुके हैं और मतगणना जारी है जिसमें भाजपा और उसके सहयोगी दलों को बढ़त मिलती दिख रही है। शुरुआती रुझानों में एन.डी.ए का पलड़ा भारी होता दिख रहा है। जाहिर है कि एक बार फिर देश की जनता नरेन्द्र मोदी में ही भरोसा जता रही है। आइए देखते हैं कि वे कौन से कारण रहे जिनके कारण नरेन्द्र मोदी में जनता का विश्वास अडिग रहा-
- एक नेता के रूप में नरेन्द्र मोदी अपने अदभुत भाषण कौशल, बेहतरीन संवाद और जनता की भाषा और बोली के कारण देश बड़ी जनसंख्या से कनेक्ट करते हैं और उनकी यही विशेषता उन्हें देश के अन्य नेताओं से अलग करती है, लोकप्रिय भी बनाती है।
- देश राष्ट्रवाद के मुद्दे पर मोदी के साथ रहा जबकि विपक्ष एक तो कटा-बंटा रहा दूसरे नोटबंदी, जीएसटी और किसानों के मुद्दे को उतनी मजबूती से 'काउंटर नरेटिव' के रूप में मोदी की छवि के बरक्स स्थापित नहीं कर पाया।
- सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा हमले के बाद एयर स्ट्राइक से देश की जनता पर मोदी का प्रभाव बढ़ा और सुरक्षा मामले प्रमुख मुद्दे बन गए और इन मामलों पर भी देश ने मोदी के विकल्प के रूप में किसी को मान्यता नहीं दिया।
- कांग्रेस और अन्य दलों में 'वंश की राजनीति' पर मोदी और भाजपा के लगातार हमले ने न केवल विपक्ष को 'डिफेंसिव मोड' में ला दिया बल्कि जनता में उनकी पकड़ को भी कमजोर किया।
- देश में बेरोजगारी एक अहम मुद्दा है लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में जनता ने पीएम मोदी को ही प्राथमिकता दी, यह बात कई सर्वे में भी सामने आ चुकी है।
- आखिरी चरण से एक दिन पहले केदारनाथ यात्रा और साधना करने की प्रक्रिया को विपक्ष द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव प्रचार की संज्ञा दी गयी ( आचार संहिता के हिसाब 48 घंटे पहले प्रचार थम जाता है)। ऐसी बातें उछाली गयीं लेकिन चूंकि हमारा देश आस्था और विश्वास से भरा हुआ है और संविधान के अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता सबको है और चूंकि नरेन्द्र मोदी एक बड़े और लोकप्रिय नेता हैं, इसलिए सबकी निगाहें उन्हें ज़रूर खोजती रहती हैं। इससे भी उनके प्रति जनता की कनेक्टिविटी बढ़ती है।
- विपक्ष के नेता का कमजोर होना भी एक अहम मुद्दा है। राहुल गांधी की छवि में बदलाव जरूर हुआ है और देश के कमजोर तबकों मसलन किसानों, मजदूरों और श्रमिक वर्गों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी भी है लेकिन प्रधानमंत्री वाली छवि में जनता मोदी को ही प्राथमिकता दे रही है और इस हिसाब से पीम एम मोदी के सामने कोई मजबूत चेहरा नहीं है, इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि मोदी की लोकप्रियता ने अभी किसी को पनपने नहीं दिया है।
- कांग्रेसी शासन के दौरान हुए एक के बाद एक घोटाले को परोसने और भ्रष्टाचार के मुद्दे को एक 'नरेटिव' के रूप में स्थापित करने में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम सफल रही।
- पीएम मोदी द्वारा चलाए गए अभियानों और उनके अद्भुत प्रबंधकीय कौशल ने भी उन्हें बड़ी आबादी में लोकप्रिय बनाए रखा।
- रफाॅल डील को विपक्ष काफी हद तक मुद्दा बनाने में सफल रहा लेकिन पुलवामा अटैक के बाद राष्ट्रवाद और देश की सुरक्षा को लेकर मोदी ने जो कुछ भी कहा उसकी प्रभावोत्पादकता अधिक रही। अधिक इसलिए भी रही कि रफाॅल जैसे मुद्दे विभिन्न वर्गों में बंटी भारतीय जनता से उस तरह कनेक्ट नहीं करते जितना देश की सुरक्षा का मामला।