लोकसभा चुनाव 2024 से पहले समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर के बाद राष्ट्रवादी नेता लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र में तीसरी बार सरकार बनाने के समीकरण तैयार कर दिए हैं। मोदी सरकार के इस निर्णय ने राजनीति में अंदर और बाहर दोनों ही जगह सियासी तौर साधने की कोशिश की है।
भाजपा और उसके पहले जनसंघ के भी संस्थापक सदस्य रहे लालकृष्ण आडवाणी को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विचार परिवार में कई पीढ़ियों के लोग भावनात्मक तौर पर जुड़ाव महसूस करते हैं। भाजपा में नए नेतृत्व के काम संभालने के बाद आडवाणी को पहले राष्ट्रपति बनाने और फिर राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में बुलाए जाने को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर लिखा था। ऐसे में देश के सबसे सीनियर नेताओं में से एक आडवाणी को अब भारत रत्न से सम्मानित कर उनके प्रशंसक और समर्थक वर्ग को खुश और चुप कर दिया गया है। राष्ट्रवादी खेमे का यह वर्ग राम मंदिर बनने और मंदिर आंदोलन के नायक आडवाणी को सम्मानित होता देखकर अधिक जोश से चुनावी मैदान में मददगार साबित होगा। इससे पहले मोदी सरकार ने साल 2015 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया था।
देश के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होने के लिए पीएम मोदी ने आडवाणी को फोन पर बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (ट्विटर) पर कहा, 'मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मैंने भी उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दी। हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक, भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है। उन्होंने हमारे गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनके संसदीय हस्तक्षेप हमेशा अनुकरणीय और दूरदर्शी रहे हैं।
पीएम ने आगे कहा, 'सार्वजनिक जीवन में आडवाणी की दशकों लंबी सेवा को पारदर्शिता और ईमानदारी के प्रति अटूट निष्ठा के रूप में देखा जाता है, जिसने राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए हैं। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है। मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानूंगा कि मुझे उनके साथ बातचीत करने और उनसे सीखने के अनगिनत अवसर मिले।'