स्थानीय ब्राहमण नेताओं ने जताया था विरोध
भाजपा के बूथ स्तर के नेताओं में इस कदर नाराजगी थी कि कई लोगों ने तो खुलकर विरोध करना शुरू किया और कुछ लोगों ने इस्तीफा देने की शुरुआत भी कर दी। हालांकि इस मामले में स्थानीय भाजपा के कुछ नेताओं ने लोगों को समझाना शुरू किया और स्थानीय विधायकों समेत कुछ अन्य जिले के भाजपा नेता मृतकों के घर भी पहुंचे, लेकिन नाराजगी इससे दूर नहीं हुई। भाजपा नेताओं ने इस बात की सूचना लखनऊ को भी दी। जिले में जिस तरीके की नाराजगी भाजपा के लोगों में बढ़ती जा रही थी उसी को देखते हुए तय हुआ कि मृतक ड्राइवर हरिओम मिश्रा और और बूथ अध्यक्ष व शुभम मिश्रा के घर किसी बड़े नेता को भेजा जाएगा। बुधवार को कानून मंत्री बृजेश पाठक ने दोनों मृतकों के दसवां संस्कार में शिरकत की और उनके परिजनों को न सिर्फ सांत्वना दी बल्कि उन्हें यह भी बताया कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। परिजनों ने अपने मृतकों को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग भी इस दौरान कानून मंत्री से की।
राजनीतिक विशेषज्ञ डॉक्टर डीके मिश्रा कहते हैं कि इस मामले में भाजपा भी अपने नफा नुकसान का आकलन कर रही है। यही वजह है कि प्रदेश सरकार के ब्राह्मण मंत्री बृजेश पाठक ब्राह्मण मृतकों के घर दसवां संस्कार में शिरकत करने पहुंचे। विशेषज्ञों का कहना है क्योंकि मामला वोटों का है और चुनाव नजदीक हैं इसलिए यह सहानुभूति के साथ-साथ राजनीतिक समीकरण और ब्राह्मणों को साधने का एक तरीका भी है। दरअसल लखीमपुर में राजनीतिक लड़ाई हमेशा ब्राह्मण बनाम पिछड़ों की ही रही है। इस वक्त लखीमपुर की सभी विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। इसलिए भाजपा कोई भी राजनैतिक नुकसान उठाने के पक्ष में नहीं है। क्योंकि लखीमपुर के मामले से उत्तर प्रदेश की राजनीति ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों का गणित साधा जा रहा है, इसलिए भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को नाराज करने का कोई भी मौका नहीं देना चाहती है।