आरबीआई द्वारा जारी किये नए नोट देखने में काफी आकर्षक हैं लेकिन क्या अपने कभी नोटों में किये गए बदलावों पर गंभीरता से विचार किया है? क्या आप हाल ही में आये 100 रुपये के नए नोट के पिछले भाग पर छपे किले को पहचानते हैं? अगर आप इस किले के बारे में नहीं जानते तो आपको नए नोटों में किये गए बदलावों, उनपर लगाए गए नए किलों के चित्र एवं उससे जुड़े इतिहास के बारे में जानना चाहिए।
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बता दें कि, नए 100 रुपये के नोट के पीछे छपा किला गुजरात के छोटे से जिले पाटन में स्थित 'रानी कि वाव' है। ये वही किला है जिसे जल संरक्षण की बेहतरीन तरकीब के तौर पर जाना जाता है और साथ ही इसे वर्ष 2014 में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल में सम्मिलित किया गया था। सालों से इस स्मारक को पाटन की पहचान के तौर पर पूरे देश में जाना जाता था लेकिन अब पूरे देश के लोग इसके चित्र को अपने बटुए में लेकर घूमेंगे।
क्या है पाटन स्थित 'रानी की वाव' स्मारक का इतिहास
रानी की वाव का निर्माण सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम की रानी उदयमति ने अपने पति की मृत्यु के उपरांत उनकी याद में बनवाया था। हालांकि, ऐसे बहुत कम होता है क्यूंकि पहले अधिकतर राजा अपनी पत्नी की याद में स्मारक बनवाया करते थे।
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इस पूरे स्मारक का ढांचा बलुई पत्थर से बना हुआ है जो 64 मीटर लंबी, 20 मीटर चौड़ी और 27 मीटर गहरी है। वाव की दीवारें और गलियारें आकर्षक प्रस्तर प्रतिमाओं से सजी हुई हैं। वाव में 500 से भी ज्यादा मूर्तिकलाओं का खूबसूरती से प्रदर्शन किया गया है। इसकी दीवारों और खंभों पर भगवान विष्णु के अनेक अवतारों की मूर्तियां बनाई गयी है।
इनके साथ ही, इंद्र, कुबेर और हनुमान के अवतारों को खूबसूरती से उकेरा गया है। वाव में 30 कि.मी लंबी सुरंग भी निकलती है, जो पाटन के सिद्धपुर में जाकर खुलती है। वाव के प्रवेश द्वार पर एक ऐसा खाना है जिसे कीर्ति तोरण का अवशेष माना जाता है।
100 Rs.
आरबीआई ने 100 रुपये की नोट के लिए क्यों चुना 'रानी की वाव'
पाटन के स्मारक 'रानी की वाव' ने पुराने 100 रुपये के नोट में छपे कंचनजंगा की जगह ले ली है। आरबीआई ने नए 100 रुपये के नोट इस वर्ष जुलाई में ही जारी कर दिए गए थे। लेकिन अब जाकर ये नोट बाजार में आसानी से उपलब्ध किये जा सकते हैं। आरबीआई द्वारा जारी किये गए एक प्रेस रिलीज में बताया गया की नोट पर रानी की वाव को लेने के पीछे एक खास कारण है।
पाटन के स्मारक को नोट के पीछे छापेने की बड़ी वजह ये है की, वह देश का पारंपरिक धरोहर है जो पिछले कई दशकों से समय की रेत के नीचे दबी हुई थी। रानी की वाव को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कई दशकों बाद फिर से पुर्नजीवित किया और आरबीआई के इसे 100 रुपये के नए नोट के पीछे छाप कर इस ओर दूसरा कदम बढ़ाया।
2000 Rs
बाकी नए नोटों के पीछे छपे स्मारकों का विवरण
2000 रुपये के नए नोट के पिछले भाग पर मंगलयान की तस्वीर छापी गयी है। विशेष तौर पर इसे भारत के मार्स मिशन के नाम से जाना जाता है। जिसकी लागत में मात्र 4.5 बिलियन का खर्च आया था। बता दें कि, समूचे विश्व में अब तक इतने कम खर्च में किसी देश ने ऐसा कारनामा नहीं किया है।
100 रुपये के साथ-साथ आरबीआई द्वारा 200 रुपये का भी नोट जारी किया गया है। इनके साथ ही 50 और 10 रुपये के भी नए नोट जारी किए गए थे।
500 Rs.
500 रुपये की नई नोट पर भारत के सबसे प्रचलित स्मारक लाल किले की तस्वीर छापी गयी है। प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले पर ध्वज फहराते हैं और देश की जनता को संबोधित करते हैं।
200 Rs.
200 रुपये के नोट के पीछे छपा सांची स्तूप मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में स्थित है। जिसका निर्माण महान सम्राट अशोक के कार्यकाल में हुआ था। सांची का स्तूप भारत की सबसे प्राचीन संरचनाओं में से एक है।
50 Rs.
50 रु के नोट के पीछे हम्पी मंदिर का चित्र बना है।ये मंदिर कर्नाटक की तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित है। हम्पी मंदिर पत्थर से बना रथ वास्तुकला का अद्भुत नमूना है, जो रथ के आकार में है।
10 रुपये के नए नोट पर 13 वी शताब्दी में निर्मित भगवान सूर्य का चक्र के साथ 24 पहियों वाले रथ पर सवार 7 घोड़ों का चित्र छपा है। जिसे सूर्य मंदिर के नाम से जाना जाता है और यह ओडिशा के कोणार्क में स्थित है।