लिरिल गर्ल
लिरिल के साथ देश में पहली बार नींबू की खुशबू वाला कोई साबुन लॉन्च किया गया था। इसे बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान लीवर इसे एक अलग पहचान देना चाहती थी। एलेक पदमसी झरने के नीचे नहाती एक लड़की का आइडिया लेकर आए। मॉडल कैरन ल्यूनेल के साथ इस विज्ञापन की शूटिंग महाराष्ट्र के खंडाला और तमिलनाडु के कोडाइकैनाल में हुई। इसके बाद लिरिल गर्ल विज्ञापन की दुनिया का एक चर्चित शब्द बन गया।
हमारा बजाज
बजाज का यह विज्ञापन भी ‘आल टाइम क्लासिक्स’ की श्रेणी में आता है। इसने बजाज स्कूटर की ख्याति घर-घर में पहुंचा दी थी। ये पदमसी के मशहूर विज्ञापनों में से एक था।
सर्फ की ललिता जी
सर्फ की खरीदारी में ही समझदारी है, इस टैगलाइन के साथ बना यह विज्ञापन भी खासा मशहूर हुआ था। माना जाता है कि इसे निरमा के ‘हेमा, रेखा, जया और सुषमा’ वाले विज्ञापन को टक्कर देने के लिए बनाया गया था।
एमआरएफ का मसलमैन
ये विज्ञापन एमआरएफ टायर का था। इस विज्ञापन को पदमसी ने बनाया था और इसकी दिलचस्प बात यह भी है कि इसका संगीत एआर रहमान ने बनाया था।
चेरी ब्लॉसम शू पॉलिश
ये एक शू पॉलिश पॉलिश का विज्ञापन था। चार्ली चैप्लिन की फिल्मों की शैली में बना यह विज्ञापन भी खासा मशहूर हुआ था।
साल 1928 में एक गुजराती परिवार में पैदा होने वाले एलेक पद्मसी को विज्ञापन की दुनिया का पितामह कहा जाता था। 'एडवरटाइज़िंग मैन ऑफ़ द सेंचुरी' कहे जाने वाले एलेक पद्मसी को साल 1999 में पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया। एडवरटाइज़िंग क्षेत्र से जुड़े लोग बताते हैं कि अस्सी के दशक में एडवरटाइज़िंग क्षेत्र के लोगों के बीच एक चुटकुला प्रचलित था।
पद्मश्री से सम्मानित
बहुमुखी प्रतिभा के धनी एड गुरू एलीक पदमसी को साल 2000 में भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि अच्छे विज्ञापन वो हैं जो बिक्री में मददगार साबित होते हैं। वैसे तो पदमसी काफी चर्चा में रहे लेकिन लिरिल साबुन के विज्ञापन से उन्हें कामयाबी मिली। खास बात ये है कि ये विज्ञापन साल 1974 में पहली बार शूट किया गया था। वो कहते थे कि विज्ञापन बनाना और उनका मशहूर होना बहुत मुश्किल काम है क्योंकि इसके लिए आपके पास कई बार मिनट नहीं बल्कि चंद सेकंड ही होते हैं।