भारतीय आयुध निर्माणियां यानि इंडियन ऑर्डनेंस फैक्टरी का इतिहास और विकास भारत में ब्रिटिश राज से जुड़ा हुआ है। 1775 के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों ने कोलकाता के फोर्ट विलियम में बोर्ड ऑफ ऑर्डनेंस की स्थापना का प्रस्ताव मंजूर किया था। यहीं से भारत में सेना आयुध की शुरुआत हुई थी। 1787 में गन पाउट फैक्टरी की स्थापना इशापुर में हुई और 1791 से उत्पादन शुरू हो गया। इसी स्थान पर 1904 में राइफल फैक्टरी की स्थापना हुई थी।
1801 में कोलकाता के कोसीपुर में गन कैरिज एजेंसी जिसे आज के दौर में गन एंड शैल फैक्टरी के नाम से जाना जाता है, की स्थापना हुई थी। इसके अगले ही साल 1802 से यहां उत्पादन शुरू हो गया। ये किसी ऑर्डनेंस फैक्टरी की पहली औद्योगिक स्थापना थी और आज तक यह सिलसिला आगे बढ़ रहा है।
भारतीय आयुध निर्माणियां एक भव्य औद्योगिक संरचना हैं जो रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत कार्य करती हैं। भारतीय आयुध निर्माणियां का मुख्यालय कोलकाता में है। यह 39 निर्माणियों, 9 प्रशिक्षण संस्थान, तीन क्षेत्रीय विपणन केंद्र और चार क्षेत्रीय संरक्षा नियंत्रणालयों का समूह है।
भारत में फैली 39 निर्माणियों की खासियतें
बहु-प्रौद्योगिकी सामर्थ्यताओं के साथ एक बृहत् और परिवर्तनीय उत्पादन आधार
अत्याधुनिक उत्पादन सुविधाएं
कुशल और पेशेवर अर्हता प्राप्त जनशक्ति और प्रबंधकीय कार्मिकों का भंडार
गुणवता मानकों का सख्त पालन (सभी इकाईयां आईएसओ 9000 प्रमाणित हैं)
आवश्यकता आधारित परिष्करण एवं सुधार के लिए मौलिक व अनुकूलित अनुसंधान एवं विकास
अभियांत्रिकी सामर्थ्यता को आगे बढ़ाना
औद्योगिक प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए एक मजबूत आधार
सुविधाजनक स्थान के कारण तैयार मार्केट तक पहुंच
भारत में 39 आयुध निर्माणियां
भारत में 39 आयुध निर्माणियां 24 विभिन्न जगहों पर नौ राज्यों में स्थित हैं। 40वीं निर्माणी की स्थापना बिहार के नालंदा में हो रही है।
| राज्य एवं संघ शासित प्रदेशों के नाम |
निर्माणियों की संख्या |
| महाराष्ट्र |
10 |
| उत्तर प्रदेश |
8 |
| मध्य प्रदेश |
6 |
| तमिलनाडु |
6 |
| पश्चिम बंगाल |
4 |
| उत्तरांचल |
2 |
| आंध्र प्रदेश |
1 |
| चंडीगढ़ |
1 |
| ओडिशा |
1 |
इससे जुड़ी प्रमुख घटनाएं
- 1801 - गन कैरिज एजेंसी की स्थापना
- 1802 -18 मार्च से कोसीपुर में उत्पादन शुरू
- 1906 - ऑर्डनेंस फैक्टरी का प्रशासन आईजी ऑफ ऑर्डनेंस फैक्टरीज के जरिए तय किया गया।
- 1948 - रक्षा मंत्रालय के अधीन किया गया
- 1962 - रक्षा मंत्रालय में उत्पादन विभाग शुरू किया गया
- 1979 - 2 अप्रैल को ऑर्डनेंस फैक्टरी बोर्ड अस्तित्व में आया
कौन-कौन इसके ग्राहक
ऑर्डनेंस फैक्टरी के प्रमुख ग्राहक हैं हमारी तीनों सेनाएं। सेना को हथियारों की आपूर्ति के अलावा आयुध फैक्टरी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस बल को भी साजो सामान बेचती हैं। हथियारों के साथ ही जवानों के कपड़े, बुलेट प्रूफ वाहन और सुरंग रोधी वाहनों का निर्माण कर उनकी भी आपूर्ति करती है।