जब से जंतर मंतर पर किसानों ने अपनी संसद बैठाई है, तब से बुजुर्ग किसान ही इसका नेतृत्व करते आ रहे है, लेकिन किसान संसद के अंतिम सप्ताह में युवाओं को मौका मिलने जा रहा है।
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनो के विरोध में जंतर मंतर पर 'किसान संसद' जारी है। अंतिम दिनों में अपनी मांग को तेज करने के लिए युवा किसानों ने मोर्चा संभाल लिया है। सभी राज्यों से युवा किसान बड़ी संख्या में दिल्ली की सीमाओं पर जुटना शुरू हो गए है। वहां से हर दिन युवा सदस्य किसान संसद में हिस्सा लेने धरना स्थल पहुंच रहे है। किसान संसद में हिस्सा लेने आ रहे युवा अपने साथ सरकार के ख़िलाफ़ नारे लिखे हुए पोस्टर समेत सरकार के किसानों को अब तक किए जूठे आश्वासनों की लिस्ट भी लेकर आ रहे है।
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जब से जंतर मंतर पर किसानों ने अपनी संसद बैठाई है तब से बुजुर्ग किसान ही इसका नेतृत्व करते आ रहे है। दो सौ किसानों में से हर दिन दो से तीन बुजुर्ग किसानों को संसद का स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुना जाता रहा है। लेकिन किसान संसद के अंतिम सप्ताह में युवाओं को मौका मिलने जा रहा है। स्पीकर और डिप्टी स्पीकर पर अब न केवल युवाओं को अवसर मिलेगा बल्कि बड़ी संख्या में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ ,उत्तराखंड और दक्षिण भारत के राज्यों से आए युवाओं को संसद में बोलने का मौका दिया जाएगया। यह युवा केंद्र सरकार के नए कानूनों वह उनके राज्य में किसानों पर हो रहे अत्याचारों और किसान विरोधी नीतियों को लेकर अपनी बात रखेंगें।
युवा सम्भालेंगे पूरा जिम्मा
किसान संसद में अब तक कितने लोग आएंगे, कितने लोग बोलेंगे इसकी पूरी जिम्मेदारी बुजुर्ग और अनुभवी किसानों के पास होती थी। लेकिन अंतिम सप्ताह में यह पूरा काम युवा किसानों के हाथ में होगा। किसान संसद के संचालन से लेकर हर दिन कितने युवा को बोलने का मौका मिलेगा और वे कितनी देर किस मुद्दे पर बोलेंगे इसकी जिम्मेदारी युवक के हाथों में होगी। अंतिम सप्ताह में महिलाओं को भी अपनी बात रखने का पूरा अवसर किसान संसद में मिलेगा। किसान संगठनों ने अब तक तीनों कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ किसान संसद में दर्जनों प्रस्ताव पास किए है।
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संसद के बाद तय होगी आगे रणनीति
जैसा कि किसान संगठन नेता किया था कि जब से संसद शुरु होगी तब से संसद की खत्म होने तक वे नए कृषि कानूनों के विरोध में अपनी किसान संसद जंतर-मंतर पर बिठायेंगे। 13 अगस्त को संसद का मॉनसून सत्र खत्म होने जा रहा है ऐसे में किसानों को भी अपनी किसान संसद को स्थगित करना होगा। किसान संगठनों का कहना है कि, किसान संसद की सफतला के बाद सभी किसान संगठनों की बैठक होगी। इसके बाद कैसे सरकार को घेरे इसकी नए सिरे से रणनीति तैयार की जाएगी।