केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू
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केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कहा, सोशल मीडिया व अन्य मंचों पर जजों के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां करना एक चिंताजनक आदत है। लोग जज के जीवन की चुनौतियों व मुश्किलों को समझे बिना उनको लेकर कुछ भी बयान देते हैं, पोस्ट करते हैं। यह ठीक नही। रिजिजू ने यह भी कहा कि विधायिका और न्यायपालिका डोमेन नियंत्रण के लिए नहीं लड़ रहे बल्कि देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाने के लिए एक ही टीम का हिस्सा हैं।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के शारदा यूनिवर्सिटी में आयोजित एक विधिक सेवा दिवस कार्यक्रम में रिजिजू ने कहा, हम जानते हैं कि न्यायाधीश क्या करते हैं लेकिन बहुत से लोग जजों के जीवन को नहीं समझते हैं। सोशल मीडिया पर कुछ अप्रिय टिप्पणियां की जा रही हैं, जब आप करीब से देखते हैं तब समझ आता है कि जजों को कितनी मेहनत करनी पड़ती है। दूर से हम जैसे लोगों के लिए उनकी जीवनशैली को समझना मुश्किल है। उन्होंने कहा, हम सार्वजनिक जीवन में खुले हुए हैं, लेकिन जज इतना नहीं खुल सकते। उनके लिए पारंपरिक कर्तव्यों से बाहर आना मुश्किल है। निचली अदालतों में चार करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित होने का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा, इस वक्त सबसे अधिक जोर निचली अदालतों पर दिये जाने की जरूरत है।