केरल हाईकोर्ट ने एक फैसले में केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने केरल पुलिस को 14 दिसंबर तक चंद्रशेखर के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाने का आदेश दिया है। अदालत ने बुधवार को पुलिस को निर्देश दिया कि केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर के खिलाफ दो आपराधिक मामलों में 14 दिसंबर तक कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाए। चंद्रशेखर पर अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले बयान देने के आरोप हैं। एक अन्य बड़े मामले में अदालत ने 29 वकीलों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 14 दिसंबर को होगी।
गौरतलब है कि कोच्चि के कन्वेंशन सेंटर में धमाके की खबर के ठीक बाद चंद्रशेखर ने फेसबुक पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था, "कांग्रेस और सीपीएम की तुष्टिकरण की राजनीति की कीमत हमेशा सभी समुदायों के निर्दोष लोगों को भुगतनी पड़ेगी। इतिहास ने हमें यही सिखाया है। बेशर्म तुष्टिकरण की राजनीति कांग्रेस / सीपीएम / यूपीए / INDI गठबंधन के लिए भी शर्मनाक है।" चंद्रशेखर के अनुसार, INDIA गठबंधन में शामिल दल केरल में नफरत फैलाते हैं। जिहाद का आह्वान करने के लिए आतंकवादी हमास को आमंत्रित करते हैं।
चंद्रशेखर ने फेसबुक पोस्ट में आगे लिखा, "यह गैर-जिम्मेदाराना पागलपन की राजनीति की पराकाष्ठा है।" उन्होंने कहा, अपने आस्तीन में सांप रखने पर यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे केवल पड़ोसियों को ही डसेंगे। कथित तौर पर भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करने के आरोपी चंद्रशेखर ने कहा, अंत में सांप उसी पर हमला करेंगे, जिन्होंने उसे पाला है। हिलेरी रोडम क्लिंटन।"
कोच्चि में विस्फोटों के तुरंत बाद, खुद को यहोवा के साक्षियों का अलग सदस्य बताने वाले शख्स ने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी। जांच में किसी भी आतंकवादी समूह का विस्फोट से कोई संबंध नहीं पाया गया। केंद्रीय मंत्री के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 और 153ए और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (ओ) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।
अवमानना मामले में 29 वकीलों पर कार्रवाई
केरल हाईकोर्ट ने कोट्टयम में एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का अपमान करने और उनकी अदालत में बाधा डालने के आरोप में 29 वकीलों के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की है।न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति जी गिरीश की खंडपीठ ने कोट्टयम अधिवक्ता संघ के कुछ पदाधिकारियों सहित इन 29 वकीलों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि वकीलों के मजिस्ट्रेट का अपमान करने के कथित कृत्य से न्याय प्रणाली की बदनामी हुई है।
अवमानना कार्यवाही का सामना कर रहे वकील मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा उस वकील के खिलाफ मामला दर्ज करने का पुलिस को आदेश दिए जाने का विरोध कर रहे थे, जिसने कथित तौर पर धोखाधड़ी मामले में एक आरोपी की जमानत पाने के लिए जाली दस्तावेज पेश किए थे। विधिज्ञ परिषद ने घटना की जांच के लिए एक समिति भी गठित की है। उच्च न्यायालय इस मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा।