नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने भारत में विदेशी छात्रों के नामांकन पर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में अगले 24 साल में यानी 2047 तक पांच लाख विदेशी छात्रों के नामांकन का लक्ष्य है। बुधवार को नीति आयोग के सीईओ ने 18वें फिक्की उच्च शिक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित किया।
सुब्रमण्यम ने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी उच्च शिक्षा क्षेत्र को 'बर्बाद' कर सकती है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने और प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपनाना होगा। उन्होंने भविष्य की नीतियों को लेकर कहा, "नीति आयोग 2047 के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार कर रहा है। इसमें शिक्षा की अलग भूमिका होगी।"
आगामी 24 साल की नीतियों के बारे में नीति आयोग के सीईओ ने कहा, इसमें एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि 2047 तक उनका लक्ष्य भारत में पांच लाख विदेशी छात्रों का एडमिशन कराना है। उन्होंने कहा कि हमें वैश्विक स्तर पर गुणवत्ता, ब्रांड मूल्य में सुधार और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त रैंकिंग में सुधार कर शिक्षा का विकास करना है। नीति आयोग के सीईओ ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में और अधिक शिक्षा के केंद्र / शहर विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने निजी क्षेत्र से उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का और विस्तार करने की अपील भी की। नीति आयोग के सीईओ ने घरेलू छात्रों को देश में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया कि अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भारत की तरफ आकर्षित करने पर जोर दिया जाए।
नीति आयोग के प्रमुख बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा, "हमें उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक इनोवेटिव होने की जरूरत है।" उन्होंने कहा, हमें शैक्षिक प्रणाली में सुधार पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है ताकि छात्र पढ़ाई के बाद उद्योग के लिए तैयार रहें।
नई प्रौद्योगिकी के महत्व पर सुब्रमण्यम ने कहा, भारत में प्रौद्योगिकी उच्च शिक्षा क्षेत्र को नष्ट करने जा रही है। विश्वविद्यालयों में एआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बड़े पैमाने पर अपनाना होगा। उन्होंने कहा, सही विचार प्रक्रिया को विकसित करने में विश्वविद्यालय बड़ी भूमिका निभाएंगे। भारतीय विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों के पास 25 साल हैं।