राजभवन में लंबित विधेयकों पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने प्रतिक्रिया देते हुए सख्त लहजें में कहा कि मैं कोई रबड़ स्टांप नही हूं, जो हां में हां मिलाएं। पढ़िए यहां...
विधानसभा से पारित विधेयकों को रोके जाने के आरोपों के बीच केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, मैं कोई रबड़ स्टांप नहीं हूं और न ही हां में हां मिलाने वाला हूं। साथ ही कहा कि जब कोई विधेयक या अध्यादेश उनके पास पहुंचता है तो वह यह पता लगाने के लिए अपना दिमाग लगाते हैं कि यह संवैधानिक और कानूनी रूप से सही है या नहीं।
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साथ ही उन्होंने कहा कि केरल के लोगों के भले के लिए बने विधेयक या अध्यादेश को नहीं रोका जाता है। इस तरह के विधेयकों को मैं तुरंत ही निपटा दूंगा। जनहित से अलग विधेयक या संविधान की मूल भावना के खिलाफ बनाए अध्यादेशों पर मुझसे हां की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने सख्त लहजें में कहा कि मैं कोई रबर स्टांप नहीं हूं।
राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए आरक्षित सात विधेयकों के बारे में इमरान खान ने कहा कि मंत्री आए लेकिन स्पष्टीकरण नहीं दे सकें। उन्होंने यह दावा करते हुए अपनी कार्रवाई को उचित ठहराया कि सात विधेयकों में से चार धन विधेयक की प्रकृति के थे क्योंकि उनमें व्यय शामिल था और इसलिए, उन्हें राज्य विधानसभा में पेश करने के लिए राज्यपाल की पूर्व अनुमति आवश्यक थी।
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वहीं विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीसन ने आलोचना करते हुए कहा, राज्यपाल विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को रोक नहीं सकते हैं। उन्हें दो वर्षों तक बिलों को अनुचित तरीके से नहीं रोकना चाहिए।
राष्ट्रपति की सहमति के लिए आरक्षित विधेयकों में दो विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक हैं।
राजभवन के मुताबिक, अन्य विधेयकों में लोकायुक्त विधेयक, विश्वविद्यालय विधेयक 2022 (कुलाधिपति के राज्यपाल को वापस लेने से संबंधित), विश्वविद्यालय खोज समिति के विस्तार से संबंधित विधेयक और सहकारी (मिल्मा) विधेयक शामिल हैं।