जानकारी के मुताबिक, विजयनगर में रहने वाली डॉ. रश्मि शशिकुमार बनेरघट्टा रोड स्थित एक निजी अस्पताल में कार्यरत है। वह बेलगावी जिले के किक्कोडी से ताल्लुक रखती है। बताया जा रहा है कि उसने सरोगेसी के माध्यम से एक दंपती को बच्चा दिलाने की पेशकश की थी। इसके एवज में उसने 14.5 लाख रुपये लिए थे और मई 2020 के दौरान बच्चा सौंप दिया था।
पुलिस के मुताबिक, उन्हें इस बच्चे को ट्रेस करने में एक साल लग गया। वह मई 2020 के दौरान अस्पताल से चोरी हुआ था। शनिवार (29 मई) को पुलिस टीम कर्नाटक उत्तर के कोप्पल पहुंची और दंपती को पूरे मामले की जानकारी दी। यह सुनकर दंपती को झटका लगा। उन्होंने बताया, 'वे तो सिर्फ इतना जानते थे कि यह बच्चा सरोगेसी के माध्यम से मिला। वे अब तक सरोगेसी करने वाली महिला से मिले तक नहीं थे।' इसके बाद पुलिस ने बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया, जिससे उसके बायलॉजिकल माता-पिता की पुष्टि हो गई। इसके बाद डॉ. रश्मि को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे उसकी 45 दिन की बेटी के साथ जेल भेज दिया गया।
गौरतलब है कि 29 मई 2020 के दिन रश्मि ने चामराजपेट स्थित बीबीएमपी सरकारी अस्पताल से बच्चे को चोरी किया था। बच्चे के पिता नवीद पाशा और मां हुस्ना बानो काम की तलाश में आंध्रप्रदेश से चामराजपेट आए थे। नवीश ऑटो ड्राइवर है। बच्चे का जन्म 29 मई को सुबह 7:50 बजे हुआ था। करीब 10 बजे जब नवीद अपनी एक रिश्तेदार को घर छोड़ने गया था, तब एक महिला डॉक्टर ने हुस्ना से बातचीत की थी। वहीं, डॉक्टर की सलाह पर अटेंडेंट ने महिला को एक दवा दी, जिसे खाकर वह सो गई। करीब 45 मिनट बाद उसकी नींद खुली तो बच्चा चोरी हो चुका था।
बताया जा रहा है कि इस मामले में अगले दिन चामराजपेट थाने में शिकायत दर्ज की गई, जिसे दिसंबर 2020 के दौरान बसावनगुडी महिला थाने में ट्रांसफर कर दिया गया। जांच के दौरान सामने आया कि जिस महिला डॉक्टर ने हुस्ना से बातचीत की थी, वह अस्पताल की कर्मचारी नहीं थी। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में वह बच्चे को ले जाती नजर आई थी। दरअसल, वह रश्मि थी, जिसने अस्पताल की चिकित्सक बनकर हुस्ना को नींद की दवा खिला दी थी। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध का स्केच तैयार कराया गया।
पुलिस ने बताया कि इस मामले की जांच के दौरान 700 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई, जिसके बाद टीम असली दंपती तक पहुंच पाई। बच्चे की तलाश के लिए स्पेशल टीम बनाने वाले डीसीपी साउथ हरीश पांडेय ने बताया कि अब बच्चे को चामराजपेट ले आए हैं।
जांच अधिकारी ने बताया कि रश्मि 2015 के दौरान हुबली के एक निजी अस्पताल में काम करती थी। उस दौरान सरोगेसी से बच्चा लेने वाले दंपती से उसकी मुलाकात हुई। दरअसल, दंपती के पास स्पेशल चाइल्ड था। ऐसे में रश्मि ने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह सरोगेसी के माध्यम से उन्हें सेहतमंद बच्चा दिला देगी। 2019 में उसने दंपती से मुलाकात की और सरोगेसी के लिए पिता के सैंपल व जरूरी कागजात ले लिए। उसने दंपती को बताया कि बंगलूरू में उसकी मुलाकात एक महिला से हुई, जो सरोगेसी के लिए तैयार है। रश्मि ने दंपती को बताया कि मई 2020 में डिलिवरी होने का अनुमान है।
मई 2020 में रश्मि ने कई सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटे। उसे चामराजपेट के सरकारी अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर लगी। 27 और 28 मई के दौरान वह हुस्ना के वॉर्ड में कई बार गई और मुख्य द्वार के पास मौजूद बेड को अपना टारगेट बना लिया। 29 मई को जब वह वॉर्ड में पहुंची तो हुस्ना अपने बच्चे के साथ थी। ऐसे में रश्मि ने अटेंडेंट को नींद की गोली दी और उसे हुस्ना को खिलाने के लिए कहा। हुस्ना के सोते ही रश्मि बच्चे को लेकर फरार हो गई। इसके बाद वह अपनी दोस्त के घर विजयनगर पहुंची और दंपती को बच्चा सौंप दिया।