मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने महिलाओं अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का विरोध करने के लिए आईसीजी को फटकार लगाई। पीठ ने थल सेना, वायु सेना और नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के शीर्ष अदालत के फैसलों का जिक्र किया और कहा कि भेदभाव खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें ध्वजवाहक बनना है और राष्ट्र के साथ चलना है। पहले महिलाएं बार में शामिल नहीं हो सकती थीं। लड़ाकू पायलट नहीं बन सकती थीं। पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे।
पीठ ने आईसीजी को प्रियंका त्यागी को बल में वापस लेने का आदेश दिया और पूछा कि क्या आप लोग अपनी महिला अधिकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार करते हैं? पीठ ने त्यागी को आईसीजी को उस पद पर फिर से बहाल करने का निर्देश दिया, जिस पर वह 2023 में सेवा के निर्वहन की तारीख तक थीं। अदालत ने आदेश दिया कि अगले आदेश तक याचिकाकर्ता को उसकी योग्यता के मुताबित जरूरी पद सौंपा जाए। त्यागी ने आईसीजी की पात्र महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की मांग की है।
सीजेआई ने कहा, हम सेना, नौसेना और वायु सेना में स्थायी कमीशन से जुड़े मामलों में पहले ही अपने फैसले दे चुके हैं। दुर्भाग्य से आईसीजी अभी तक बाहरी बना हुआ है। तटरक्षक बल में शामिल होने वाली एक महिला का प्रतिरोध देखें। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह लैंगिक समानता के खिलाफ नहीं हैं और वह मामले में तथ्यों व बदलावों के लिए बल की तैयारी का जिक्र कर रहे थे।