झारखंड विधानसभा में नमाज के लिए अलग कमरा आवंटित करने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को उछाल कर इसका सियासी फायदा उठाने की तैयारी में है। पार्टी ने पूरे सप्ताह विरोध जताने का प्लान तैयार कर लिया है। हर जिले में विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। इस मुद्दे को लेकर कल विधानसभा के बाहर भाजपा विधायकों ने भजन गया था। आज हनुमान चालीसा का पाठ करने का कार्यक्रम है। भाजपा विधायक पूरे विधि-विधान से हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। भाजपा नेतृत्व अपने विधायकों के पूजा-पाठ के कार्यक्रम से गद्गद है और इस मुद्दे को पूरे देश में भुनाए जाने की रणनीति बनाई जा रही है।
विरोध प्रदर्शन के मुख्य सूत्रधार बने विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक विरंची नारायण से अमर उजाला डिजिटल ने इस पूरे मुद्दे पर खास बातचीत की।
आपको कब पता चला कि नमाज के लिए अलग कमरा आवंटित हुआ है?
जवाब- दो सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो के आदेश पर नमाज के लिए कमरा नंबर टी डब्लू-348 आवंटित किया गया है। सत्र शुरू होने के बाद हमें इसकी जानकारी मिली। मैंने कमरे का वीडियो बनाया, पार्टी फोरम में इस पर चर्चा की। उसके बाद हमने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की, कि इस कमरे का आवंटन रद्द किया जाए। विधानसभा परिसर में एक धर्म विशेष के लिए इस तरह की व्यवस्था नहीं की जा सकती।
आपकी पार्टी ने इसे मुद्दा क्यों बना दिया है, क्या विधानसभा में भजन-कीर्तन करना आपको ठीक लगा?
जवाब- सोचने वाली बात है कि मुस्लिम तुष्टिकरण की कोशिश क्यों की जा रही है? पहले सरकारें मुस्लिम तुष्टिकरण करती थीं लेकिन अब विधानसभा अध्यक्ष करने लगे हैं। यह लोकतांत्रिक अपराध है। यदि विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो मुस्लिम सदस्यों के लिए नमाज पढ़ने के लिए कमरा आवंटित कर सकते हैं तो अलग-अलग धर्मों के लिए भी कक्ष आवंटित किया जाए। जिससे सभी धर्म के लोग प्रार्थना कर सकें। फिर हमने भजन-कीर्तन किया तो क्या गलत है। आज हम हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।
आप किस बात से नाराज हैं नमाज के लिए अलग कमरा दिए जाने के या दूसरे धर्मों के लिए कमरा आवंटित नहीं होने से?
जवाब- हमारा केवल इतना कहना है कि यदि नमाज के लिए अलग कमरा आवंटित किया जा सकता है तो दूसरे धर्मों के लिए लोगों की प्रार्थना के लिए भी किया जा सकता है। हम भी चाहते हैं कि जब सत्र चल रहा हो और हम पूजा-पाठ करना चाहें तो अपने कमरे में कर सकें। विधानसभा अध्यक्ष हमारे संख्या बल के हिसाब से हमारे लिए भी कमरे आवंटित करें।
विधानसभा अध्यक्ष का कहना है, यह व्यवस्था अविभाजित बिहार से ही बनी हुई है। पुराने विधानसभा में भी एक कमरा था, अब विधानसभा नए भवन में स्थानांतरित हो गया है इसलिए कमरे की व्यवस्था करनी पड़ी, तो विवाद क्यों?
जवाब- इसकी जरूरत क्या है? विधानसभा में सभी धर्मों के लोग चुन कर आए हैं। एक धर्म को यह विशेषाधिकार क्यों दिया जा रहा है? क्या हम विधानसभा परिसर में हनुमान या शिव मंदिर बनाने की बात करेंगे तो इसे माना जाएगा? विधानसभा अध्यक्ष एक गलत परंपरा शुरू कर रहे हैं, इससे अच्छा संदेश नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी समझ लें कि यदि वे इस तरह मुसलमानों का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं तो वे भ्रम में है।
फैसला वापस नहीं हुआ तो क्या करेंगे?
जवाब-यदि विधानसभा अध्यक्ष सभी धर्म के लोगों के लिए कमरा आवंटित नहीं कर सकते हैं तो नमाज के लिए अलग कमरा आवंटित करने का आदेश वापस लें। नहीं तो विधानसभा नहीं चलेगी। यदि नौ सितंबर तक विधानसभा अध्यक्ष यह फैसला वापस नहीं लेते हैं तो हम कोर्ट की शरण में जाएंगे।