कर्नाटक की राजनीति में हलचल मची हुई है। कई महिलाओं से यौन शोषण के आरोप झेल रहे पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के पोते प्रज्ज्वल रेवन्ना की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वहीं, इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर बढ़ता जा रहा है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अश्लील वीडियो वायरल करने के पीछे कुमारस्वामी का हाथ बताया। साथ ही जेडीएस नेता को ब्लैकमेलिंग का राजा और कहानी के प्रमुख, निर्देशक और निर्माता भी कहा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार ने कुमारस्वामी को मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी किए जाने की मांग की और उन्हें मुख्य साजिशकर्ता बताया।
यह है मामला
बता दें, कुमारस्वामी के भतीजे और 33 साल के जेडीएस सांसद प्रज्ज्वल रेवन्ना यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे हैं। इस मामले ने राजनीतिक गलियारे में तूफान ला दिया है। सत्तारूढ़ कांग्रेस और भाजपा-जेडीएस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस सरकार ने मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जबकि भाजपा और एनडीए के सहयोगी जेडीएस ने मांग की है कि इसे सीबीआई को सौंपा जाए।
कुमारस्वामी पेन ड्राइव मामले के बारे में सब कुछ जानते हैं
शिवकुमार ने चुटकी लेते हुए कहा, 'कुमारस्वामी पेन ड्राइव मामले के बारे में सब कुछ जानते हैं। एक वकील (देवराजे गौड़ा) और अन्य लोग बोल रहे हैं। कुमारन्ना (कुमारस्वामी) मेरा इस्तीफा चाहते हैं, ऐसा लगता है कि वोक्कालिगा नेतृत्व के लिए प्रतिस्पर्धा है। मुझे इस्तीफा देने दीजिए, जैसा वह ऐसा चाहते हैं।'
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, 'एक के बाद एक (राजनीतिक रूप से) खत्म करना उनका (कुमारस्वामी) काम है। कुमारस्वामी ब्लैकमेल के बादशाह हैं। वह सभी कोअधिकारियों, राजनेताओं को धमकी दे रहे हैं। इसके सिवा उनके पास और क्या करने के लिए है? उन्हें करने दीजिए, इन सब पर चर्चा करने का समय है, विधानसभा में चर्चा करते हैं।'
कुमारस्वामी ने लगाए थे आरोप
इससे पहले कुमारस्वामी ने मंगलवार को दावा किया था कि उनके भतीजे, लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना द्वारा कथित तौर पर महिलाओं के यौन शोषण के वीडियो वाले 25,000 पेन ड्राइव चुनाव से पहले बांटे गए थे और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार पर साजिश का आरोप लगाया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रज्ज्वल के खिलाफ कई महिलाओं का यौन शोषण करने के आरोपों की जांच के लिए 28 अप्रैल को कांग्रेस सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को भी बदनाम करने की मांग की थी, क्योंकि सोशल मीडिया पर कथित तौर पर उनके साथ वीडियो वायरल होने लगे थे।