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Maharashtra: एनसीपी नेता जयंत पाटिल बोले- अजित पवार के साथ गठबंधन का कोई सवाल नहीं, विधानसभा चुनाव भी जीतेंगे

Thu, 25 Jul 2024 09:38 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

जयंत ने कहा कि महाविकास अघाड़ी के तहत लड़े गए लोकसभा चुनाव में एनसीपी (शरद) ने दस में से आठ सीटें जीतीं। जबकि एनसीपी (ए) के प्रमुख और उप मुख्यमंत्री अजित पवार केवल रायगढ़ सीट से ही जीत हासिल कर पाए। वह बारामती और शिरूर में हार गए।
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जयंत पाटिल। - फोटो : ANI
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विस्तार
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एनसीपी (शरद) के नेता जयंत पाटिल ने गुरुवार को कहा कि अब अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (ए) से गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को जनता का समर्थन मिल रहा है। हम लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल करेंगे। उन्होंने मराठा समुदाय को आरक्षण देने में हो रही देरी पर महाराष्ट्र सरकार पर हमला बोला। वहीं ओबीसी समुदाय के आरक्षण की मांग पर जयंत ने कोई जवाब नहीं दिया।

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जयंत ने कहा कि महाविकास अघाड़ी के तहत लड़े गए लोकसभा चुनाव में एनसीपी (शरद) ने दस में से आठ सीटें जीतीं। जबकि एनसीपी (ए) के प्रमुख और उप मुख्यमंत्री अजित पवार केवल रायगढ़ सीट से ही जीत हासिल कर पाए। वह बारामती और शिरूर में हार गए। दोनों पार्टियां अलग हो गईं हैं। दोनों के चिह्न अलग हैं। ऐसे में दोनों के बीच गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं उठता।  

पाटिल ने कहा कि शिंदे सरकार केंद्रीय बजट में महाराष्ट्र को कोई लाभ नहीं दिला सकी। इससे साफ है कि सत्ता में काबिज गठबंधन के नेताओं का केंद्र सरकार पर कोई प्रभाव नहीं है। सरकार ने बजट में महाराष्ट्र के साथ हुए अन्याय के खिलाफ भी आवाज नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश और बिहार ने बजट को लेकर केंद्र सरकार पर खूब दबाव डाला। उन्होंने केंद्र सरकार को ब्लैकमेल किया और अपने राज्य के लिए ज्यादा बजट ले लिया। 
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पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी समर्थित महाविकास अघाड़ी को 288 में से 170 सीटें मिलेंगीं। 

फडणवीस को ऐसी राजनीति नहीं करनी चाहिए
राज्य के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की ओर से डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस पर लगाए गए आरोपों को लेकर जयंत ने कहा कि वरिष्ठ भाजपा नेता को ऐसी राजनीति नहीं करनी चाहिए। दरअसल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता देशमुख ने आरोप लगाया था कि साल 2021 में (तब विपक्ष में रहे) फड़णवीस द्वारा कथित रूप से भेजे गए एक व्यक्ति ने उनसे मुलाकात की थी और उसके पास तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके बेटे और कैबिनेट मंत्री आदित्य ठाकरे, तत्कालीन वित्त मंत्री अजित पवार और तत्कालीन परिवहन मंत्री अनिल परब को फंसाने वाले कई हलफनामे थे। पूर्व मंत्री ने दावा किया कि उस व्यक्ति ने उनसे कहा था कि उन्हें खुद को मुकदमेबाजी से बचाने के लिए इन हलफनामों पर दस्तखत कर देना चाहिए, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया था।

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