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IPS: एयरपोर्ट पर अफसर ने महिला कर्मी से की छेड़छाड़, पढ़िए 96 घंटे की कहानी, CRPF के पूर्व एडीजी पर हैं आरोप

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 03 Apr 2024 07:56 PM IST

सार

गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दिगंता बराह 'आईपीएस' ने 27 मार्च को असम के डीजीपी जीपी सिंह को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने सीआरपीएफ के तत्कालीन एडीजी बिनोद कुमार सिंह की जांच से संबंधित बातों का उल्लेख किया। पत्र के मुताबिक, एलजीबीआई एयरपोर्ट गुवाहाटी के प्रमुख एयरपोर्ट अधिकारी ने 18 मार्च को डीसीपी वेस्ट गुवाहाटी के नाम भेजे पत्र में महिला से हुई छेड़छाड़ के बारे में विस्तार से बताया था। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media


एयरपोर्ट प्राधिकरण ने इस मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में यह मामला सही पाया गया। मामले की गूंज असम पुलिस और सीआरपीएफ से बाहर निकल कर केंद्रीय गृह मंत्रालय तक पहुंच गई। 96 घंटे की कहानी में बहुत कुछ बदल गया। शिकायतकर्ता महिला कर्मी ने कहा कि एडीजी ने उनसे क्षमा मांग ली है। अब वे इस मामले को आगे बढ़ाना नहीं चाहतीं। 


दूसरी तरफ, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईपीएस अधिकारी को उनके मूल कैडर में भेजने में देरी नहीं लगाई। अधिकारी को दूसरी बार प्रतिनियुक्ति की तय अवधि पूरी होने से पहले ही मूल कैडर में लौटना पड़ा है। 




17 मार्च को हुई थी छेड़छाड़ की घटना

गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दिगंता बराह 'आईपीएस' ने 27 मार्च को असम के डीजीपी जीपी सिंह को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने सीआरपीएफ के तत्कालीन एडीजी बिनोद कुमार सिंह की जांच से संबंधित बातों का उल्लेख किया। पत्र के मुताबिक, एलजीबीआई एयरपोर्ट गुवाहाटी के प्रमुख एयरपोर्ट अधिकारी ने 18 मार्च को डीसीपी वेस्ट गुवाहाटी के नाम भेजे पत्र में महिला से हुई छेड़छाड़ के बारे में विस्तार से बताया था। 


अधिकारी ने अपने पत्र में लिखा कि छेड़छाड़ की घटना 17 मार्च को सुबह दस बजे हुई थी। उस वक्त आईपीएस एडीजी बिनोद कुमार सिंह, एलजीबीआई एयरपोर्ट गुवाहाटी से कहीं जा रहे थे। हमें सहायक आयुक्त राजबीर सिंह, 'प्रशासन' स्पेशल डीजी दफ्तर, नॉर्थ ईस्ट जोन हेडक्वार्टर सीआरपीएफ, गुवाहाटी की तरफ से 16 मार्च को एक पत्र प्राप्त हुआ था। उसमें आग्रह किया गया था कि एडीजी बिनोद कुमार सिंह, इस एयरपोर्ट से रवाना होंगे। इसके लिए उन्हें रिजर्व लाउंज की सुविधा मुहैया कराई जाए। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने सीआरपीएफ एडीजी को वह सुविधा मुहैया करा दी। इसके बाद 17 मार्च को रिजर्व लाउंज पर कार्यरत महिला कर्मी की तरफ से अथॉरिटी को एक शिकायत मिली। उसमें कहा गया कि एडीजी बिनोद कुमार सिंह ने जबदस्ती आलिंगन किया। 


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महिला पर टिप्पणी करने के आरोप

शिकायत के मुताबिक, ''बिनोद कुमार सिंह ने उस वक्त नीले रंग की टी शर्ट पहन रखी थी। वे रिसेप्शन डेस्क पर आए। पहले तो वे उस महिला की नौकरी और परिवार के बारे में पूछने लगे। वे महिला की तरफ टकटकी लगाकर देखने लगे। इससे महिला कर्मी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने महिला की मुस्कान, दांतों और होठों के बारे में भी टिप्पणी की। एडीजी ने महिला कर्मी से कहा कि वह उनका मोबाइल नंबर ले सकती है। अगर वह कभी किसी मुसीबत में हो तो वे उसकी मदद कर सकते हैं। 


उन्होंने महिला कर्मी से कुछ और डिटेल मांगी। उसके बाद एडीजी ने कहा, वे आलिंगन करना चाहते हैं। महिला कर्मी ने इसके लिए मना कर दिया। फिर एडीजी ने महिला कर्मी के हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया। महिला कर्मी ने मुश्किल से खुद को एडीजी की पकड़ से छुड़ाया। महिला कर्मी ने कहा कि आप ऐसा न करें, ठहर जाएं। इसके बाद वहां पर प्रोटोकॉल स्टाफ पहुंच गया। तभी एडीजी बिनोद कुमार सिंह, लॉंज से बाहर चले गए।'' मुख्य हवाईअड्डा अधिकारी उत्पल बरुआ ने अपने पत्र में लिखा था कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि एयरपोर्ट पर कार्यरत महिला कर्मी को न्याय देना सुनिश्चित हो सके। 


मोइत्रा डेका एपीएस, एडीसीपी को सौंपी गई जांच

गुवाहाटी के पुलिस आयुक्त दिगंता बराह 'आईपीएस' द्वारा असम के डीजीपी जीपी सिंह को लिखे पत्र में कहा गया, मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। यौन शोषण मामले की जांच मोइत्रा डेका एपीएस, एडीसीपी 'ईस्ट' गुवाहाटी को जांच सौंपी गई। उन्होंने मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार की। प्रारंभिक तौर पर यह केस एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है। 20 मार्च को मुख्य हवाईअड्डा अधिकारी ने अपने पत्र के माध्यम से डीसीपी वेस्ट को सूचित किया था कि सीआरपीएफ के एडीजी बिनोद कुमार सिंह, आईपीएस ने उक्त महिला कर्मी से क्षमा मांग ली है। इसके बाद उक्त महिला कर्मी ने अपनी शिकायत वापस ले ली। इस मामले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2 मार्च को उत्तर प्रदेश कैडर के 1994 बैच के आईपीएस, बिनोद कुमार सिंह को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस उनके मूल कैडर यानी उत्तर प्रदेश में भेजने के आदेश जारी कर दिए। 




पीएमओ के हस्तक्षेप से हुए थे रिलीव

बिनोद कुमार सिंह को पिछले वर्ष बल के उत्तर पूर्व जोन में स्पेशल डीजी का कार्यभार सौंपा गया था। सामान्य तौर पर ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है कि प्रतिनियुक्ति पर आने वाला आईपीएस अधिकारी एक वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ही अपने मूल कैडर में लौट जाए। बता दें कि इससे पहले भी जब आईपीएस अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर आए थे तो भी उन्हें तय अवधि से पहले ही वापस अपने मूल कैडर में जाना पड़ा था। उस वक्त पीएमओ को भी इस आईपीएस के मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था। तभी उन्हें वापस अपने कैडर में जाने के लिए रिलीव किया जा सका।

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