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Air Force Day 2021: वो 11 बड़े मौके जब वायुसेना ने दिखाया पराक्रम...भारत को मिली विजय

Fri, 08 Oct 2021 10:05 AM IST
अजय सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार



 
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भारतीय वायु सेना - फोटो : अमर उजाला
आज से 89 साल पहले देश के आसमानी लड़ाकों की टीम तैयार हुई थी। ये टीम थी हमारी भारतीय वायुसेना की। 8 अक्तूबर 1932 में भारतीय वायुसेना की नींव रखी गई थी। और इस दिन को भारतीय वायुसेना दिवस (IAF Day - Indian Air Force Day) के रूप में मनाया जाता है। शुरुआत में वायुसेना में 4 चार वेस्टलैंड वापिती बाइप्लेन्स थे और पांच भारतीय पायलट। आज भारतीय वायुसेना के बेड़े में 1720 से ज्यादा विमान हैं और 1.70 लाख से ज्यादा वायुसैनिक। हम आपको उन 11 बड़े मौकों के बारे में बता रहे हैं जब देश को विजय दिलाने में भारतीय वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई और अपना पराक्रम दिखाया। 
 
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1. द्वितीय विश्व युद्धः जापानी सेना को थाईलैंड में रोका

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द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय वायुसेना - फोटो : wiki
द्वितीय विश्व युद्ध में जब जापानी सेना बर्मा की तरफ बढ़ रही थी तब भारतीय वायुसेना ने उसे रोका था। इसके लिए भारतीय वायुसेना ने थाईलैंड में अराकान, माए होंग सोन, चियांग माई और चियांग राई बेस पर मौजूद जापानी सेना को मार भगाया था। इस युद्ध में भारतीय वायुसेना ब्रिटिश और अमेरिकी सेनाओं की मदद कर रही थी। इस युद्ध के हीरो थे फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्जन सिंह। जो बाद में एयरफोर्स के मार्शल बने। 
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2. 1947: जब देश आजाद हुआ, राहत कार्य में लगी वायुसेना

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राहत कार्य में भारतीय वायुसेना - फोटो : wiki
देश की आजादी के साथ भारत और पाकिस्तान अलग हो गए। वायुसेना भी दो भागों में बंट गई। उसी समय जम्मू-कश्मीर की राजशाही पर कबीलाई हमलावरों ने हमला कर दिया। इन कबीलाई हमलावरों को पाकिस्तान का समर्थन था। दोनों देशों के बीच अघोषित युद्ध चल रहा था। जब कश्मीरी लोग फंस गए, तब भारतीय वायुसेना ने उन्हें निकालने में मदद की।

3. 1960-61: कॉन्गो में शांति स्थापित किया, गोवा को आजादी दिलाई

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गोवा के लिए ऑपरेशन विजय में भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान कैनबेरा (फाइल फोटो) - फोटो : wiki
1960 में कॉन्गो से बेल्जियम का शासन खत्म हुआ। इसके बाद पूरे कॉन्गो में हिंसा और विद्रोह होने लगा। इसे रोकने के लिए भारतीय वायुसेना ने पांच स्क्वाड्रन कॉन्गो भेजे ताकि शांति कायम की जा सके। इसके बाद, 1961 में पुर्तगाली शासन गोवा को छोड़ना नहीं चाहता था। तब भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन विजय चलाया। भारतीय वायुसेना ने पुर्तगाली सेना को हराकर गोवा को आजादी दिलाकर भारत से मिलाया। 
 
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4. 1965: पाकिस्तानी सेनाओं की धज्जियां उड़ा दीं

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गोवा के लिए ऑपरेशन विजय में भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान - फोटो : defenceupdate.in
1947 के बाद पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर पर कब्जे के लिए दूसरी बार हमला करने की हिमाकत की। लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी। भारतीय वायुसेना ने न केवल उसके लड़ाकू विमानों को मार गिराया, बल्कि कई सैन्य बेसों को ध्वस्त कर दिया। भारतीय वायुसेना को भी काफी नुकसान हुआ, लेकिन हमारे वीर जवानों ने पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा दीं। 

 
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5. 1971: बांग्लादेश की आजादी के लिए पाक सेना को सरेंडर कराया

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भारत-पाकिस्तान 1971 युद्ध विशेष
49 साल पहले, पाकिस्तानी सेना के 93,000 सदस्यों ने सफेद झंडे उठाए और 1971 के भारत-पाक युद्ध का अंत करते हुए भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह संघर्ष बांग्लादेश की आजादी के युद्ध का परिणाम था, जब बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) पाकिस्तान (पश्चिम) से आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। 

बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराने में भारतीय वायुसेना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय वायुसेना के विमानों ने बांग्लादेश के ऊपर 12 हजार से ज्यादा उड़ाने भरीं। पाकिस्तान ने इधर राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर के रास्ते भारत पर हमला कर दिया था। लोंगेवाला की लड़ाई हुई। भारतीय वायुसेना ने इस लड़ाई में पाकिस्तान के 94 विमानों को मार गिराया था। 
 
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6. 1984: ऑपरेशन मेघदूत- जब सियाचिन पर भारत ने किया कब्जा

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siachin - फोटो : File Photo
भारतीय वायुसेना की मदद से भारतीय थल सेना ने 13 अप्रैल 1984 को ऑपरेशन मेघदूत चलाकर सियाचिन पर हमला किया। इसके बाद भारत के कब्जे में पूरा का पूरा सियाचिन ग्लेशियर आ गया। फायदा ये हुआ कि इस रणनीतिक क्षेत्र में भारत के पास करीब 3000 वर्ग किमी का क्षेत्रफल आ गया
 

7. 1987: श्रीलंका में सिविल वॉर के समय ऑपरेशन पूमलाई चलाया

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पूमलाई में इस्तेमाल हुआ वायुसेना का विमान एएन-32 - फोटो : wiki
7. 1987: श्रीलंका में सिविल वॉर के समय ऑपरेशन पूमलाई चलाया
श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों के चलते सिविल वॉर चल रहा था। श्रीलंका सरकार ने भारत से मदद मांगी। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन पूमलाई चलाया। ताकि विद्रोह के चलते परेशान लोगों को राहत और मदद मिल सके। इसी साल ऑपरेशन पवन चलाया गया ताकि श्रीलंका के एक लाख सुरक्षबलों को संघर्षरत उत्तरी और पूर्वी श्रीलंका से सुरक्षित निकाला जा सके। इसके लिए भारतीय वायुसेना के विमानों ने 70 हजार उड़ानें भरी थीं। 
 

8. 1988: मालदीव पर होने वाले हमले को रोका, शांति स्थापित की

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airforce day
3 नवंबर 1988 को भारतीय वायुसेना ने आगरा से मालदीव की राजधानी माले में चार मिराज फाइटर जेट और आईएल-76 उतारे। क्योंकि राष्ट्रपति गयूम ने मदद मांगी थी कि उनके देश में हथियारबंद अपराधियों ने कब्जा कर लिया है। वे माले में हमला करना चाहते हैं। इसे रोकने के लिए भारतीय वायुसेना के पैराट्रूपर्स ने माले एयरपोर्ट को सुरक्षित किया और हमलावरों को मार गिराया। इस मिशन का नाम था - ऑपरेशन कैक्टस।

9. 1999: करगिल युद्ध में ऑपरेशन सफेद सागर

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करगिल युद्ध में इस्तेमाल किया गया लड़ाकू विमान मिराज-2000 (फाइल फोटो) - फोटो : social media
करगिल युद्ध में भारतीय थल सेना ने वायुसेना से मदद मांगी थी। वायुसेना ने हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों से करगिल की चोटियों पर हमला शुरू किया। लेकिन हमारे दो फाइटर जेट और एक हेलीकॉप्टर मिसाइल हमलें में ध्वस्त हो गए। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने रणनीति बदली। राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट द्वारा बनाए गए मिराज और रूसी फाइटर जेट मिग-29 से पाकिस्तानी घुसपैठियों के ठिकानों पर हमले शुरू किए। पूरे करगिल युद्ध में वायुसेना के विमानों ने हर दिन करीब 40 उड़ानें भरीं। आखिरकार 26 जुलाई को भारतीय सेना जीत गई। 
 
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10. 2019: बालाकोट में आतंकी कैंपों को ध्वस्त किया

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बालाकोट एयरस्ट्राइक (फाइल फोटो) - फोटो : twitter
जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आत्मघाती हमला किया। सीआरपीएफ के 46 जवान शहीद हो गए। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने 15 दिन के अंदर ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के बालाकोट, चकोठी, मुजफ्फराबाद में 12 मिराज-2000 फाइटर प्लेन से हमले कर पाकिस्तान के आतंकी कैंपों को ध्वस्त किया। 
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