MEA: विदेश मंत्रालय ने कहा, भारत ने देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन के साथ-साथ मॉरिशस के साथ अपनी दीर्घकालिक व करीबी साझेदारी और उपनिवेशवाद से मुक्त होने के अपने सिद्धांतों के अनुरूप चागोस पर मॉरिशस के दावे का समर्थन किया है।
भारत ने चागोस द्वीप समूह को मॉरिशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले का स्वागत किया है। यह फैसला एक ऐतिहासिक समझौते के तहत लिया गया है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मॉरिशस के लिए यह महत्वपूर्ण समझौता उपनिवेश मुक्त होने की प्रक्रिया को पूरा करता है।
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मंत्रालय ने कहा, हम ब्रिटेन और मॉरिशस के बीच चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता को मॉरिशस को सौंपने के समझौते का स्वागत करते हैं। एमईए ने यह भी कहा कि लंबे समय से चले आ रहे चागोस विवाद का समाधान दो वर्षों की बातचीत के बाद संभव हुआ है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप है और एक सकारात्मक घटनाक्रम है।
बयान में कहा गया, भारत समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मॉरिशस और अन्य समान विचारधारा वाले साझेदारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। चागोस विवाद पर भारत ने हमेशा मॉरिशस के दावे का समर्थन किया है, जो उपनिवेश मुक्त होने के सिद्धांतों और देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के अनुरूप है।
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आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, इस मामले पर भारत सक्रिय नजर नहीं आया, लेकिन उसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत ने मॉरिशस की स्थिति का मजबूती से समर्थन किया और दोनों पक्षों को खुले मन से बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित किया। सूत्रों का मानना है कि यह अंतिम परिणाम सभी पक्षों के लिए लाभदायक होगा और यह हिंद महासागर क्षेत्र में दीर्घालिक सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस समझौते के बाद भारत और मॉरिशस के बीच सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।
पूरा विवाद क्या था
चागोस द्वीप समूह को लेकर ब्रिटेन और मॉरिशस के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। यह द्वीप समूह पहले फ्रांस के उपनिवेश का हिस्सा था। लेकिन 1845 में इसे ब्रिटेन को सौंप दिया गया। इसके बाद ब्रिटेन ने चागोस के निवासियों को जबरन वहां से निकाल दिया। मॉरिशस को 1968 में आजादी मिली लेकिन वह चागोस द्वीप समूह तब भी ब्रिटेन के नियंत्रण में रहा। मॉरिशस ने समय-समय पर इस क्षेत्र को अपना हिस्सा मानते हुए ब्रिटेन से इसे वापस सौंपने की मांग की। चागोस के निवासियों ने भी लंबे समय तक अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ कानूनी मामले भी दायर किए, ताकि वह अपनी जमीन पर वापस लौट सकें। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में ब्रिटेन के कब्जे को चुनौती दी गई थी। हालांकि, ब्रिटेन इस द्वीप समूह का रणनीतिक सैन्य ठिकाने के रूप में इस्तेमाल करता रहा। वहीं, अमेरिका ने भी इस पर अपना सैन्य ठिकाना बनाया।