साल 2017, 2018, 2019 व फरवरी 2020 तक रक्षा मंत्रालय की जमीन पर अवैध निर्माण/अतिक्रमण की बात करें, तो इसमें हरियाणा टॉप पर है। इस अवधि के दौरान कुल 47.579 एकड़ भूमि पर कब्जे की बात सामने आई थी, जिसमें से हरियाणा में 17.628 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हुआ है।
इसी तरह यदि कब्जा हटाने की रिपोर्ट पर गौर करें तो मालूम होता है कि पिछले तीन वर्षों में 174.3172 एकड़ भूमि को लोगों के कब्जे से मुक्त कराया गया है। इसमें उत्तर प्रदेश में 72.2048 एकड़ भूमि, हिमाचल प्रदेश में 39.6743 एकड़ जमीन और हरियाणा में 34.9853 एकड़ जमीन शामिल है।
अवैध कब्जा करने वाले 41 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
राज्य क्षेत्र (एकड़ में) |
| दिल्ली 4.069
गुजरात 0.009 हरियाणा 17.628 हिमाचल प्रदेश 0.014 जम्मू-कश्मीर 0.351 कर्नाटक 0.413 केरल 0.063 मध्यप्रदेश 2.627 महाराष्ट्र 6.042 पंजाब 1.468 राजस्थान 3.325 तमिलनाडु 1.213 तेलंगाना 0.279 उत्तरप्रदेश 7.671 उत्तराखंड 0.488 पश्चिम बंगाल 2.01 |
| कुल 47.579 एकड़ |
राज्य क्षेत्र (एकड़ में) |
| बिहार 0.9206
दिल्ली 0.6760 गुजरात 0.0562 हरियाणा 34.9853 हिमाचल प्रदेश 39.6743 जम्मू कश्मीर 0.1450 झारखंड 0.0200 कर्नाटक 0.270 मध्यप्रदेश 8.7896 केरल एंड लक्ष्यद्वीप 0.0200 महाराष्ट्र 1.6198 मेघालय 0.1976 पंजाब 3.3244 राजस्थान 0.7700 तमिलनाडु 1.1198 तेलंगाना 0.1350 उत्तरप्रदेश 72.2048 उत्तराखंड 9.5686 पश्चिम बंगाल 0.0450 |
| कुल 174.3172 एकड़ भूमि |
रक्षा मंत्रालय में राज्यमंत्री श्रीपद नाइक के अनुसार, रक्षा मंत्रालय अपनी भूमि का प्रबंधन, भूमि संबंधी विद्यमान नीति और तय दिशा निर्देशों के तहत कर रहा है। रक्षा भूमि पर अवैध निर्माण या अतिक्रमण न हो, इसके लिए सख्त निगरानी रखी जाती है।
तीन वर्षों के दौरान अवैध कब्जे के अनेक मामले सामने आए हैं, जिन्हें समय-समय पर हटवाया भी गया है। रक्षा भूमि का प्रबंधन, जिसे सौंपा गया है, वही इसके संरक्षण, अतिक्रमण हटाने और भूमि उपयोग की योजना बनाने के लिए जिम्मेदार है।
भूमि रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण, डिजिटलीकरण, सर्वेक्षण, सीमांकन, सत्यापन और लेखा परीक्षा के जरिए रक्षा भूमि प्रबंधन को सुदृढ़ बनाया जाता है। सीईओ, डीईओ व स्टेशन कमांडर को अपने क्षेत्राधिकार वाले स्थलों का नियमित रूप से निरीक्षण करने के लिए कहा गया है।