जानकारी के मुताबिक, बच्चों को कोरोना का टीका लगाने से पहले कोवाक्सिन को लंबे ट्रायल से गुजरना पड़ा। इसके तहत भारत बायोटेक कंपनी ने दो से 18 तक की उम्र के बच्चों पर तीन चरणों में ट्रायल किए। सितंबर 2021 के दौरान दूसरे और तीसरे चरण का ट्रायल पूरा किया गया। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही भारत बायोटेक की कोवाक्सिन का टीका बच्चों को लगाने की मंजूरी दे देगी, जिसके बाद इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
ऐसे में लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यह है कि बच्चों को वैक्सीन के कितने डोज लगाए जाएंगे। सरकार की ओर से मिली सूचना के तहत वयस्कों की तरह बच्चों को भी कोवाक्सिन की दो डोज लगाई जाएंगी। इन दोनों डोज के बीच कितना गैप रखा जाएगा, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है। अगर वयस्कों की बात करें तो कोवाक्सिन की एक डोज लगवाने के बाद चार से छह सप्ताह का गैप रखा जाता है।
लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को कोरोना का टीका लगवाने के लिए पंजीकरण कैसे कराना होगा? क्या उनके लिए भी आधार कार्ड ही अनिवार्य होगा? क्या बच्चों का पंजीकरण भी कोविन ऐप के माध्यम से होगी? जानकारों की मानें तो सिर्फ आधार कार्ड से ही कोरोना टीकाकरण के लिए बच्चों का पंजीकरण नहीं होगा। इसके लिए जन्म प्रमाण-पत्र को मुख्य कागजात के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा कोविन ऐप पर पंजीकरण की भी जरूरत नहीं होगी, क्योंकि सरकार की ओर से टीकाकरण के लिए वॉक-इन की सहूलियत पहले भी शुरू की जा चुकी है। साथ ही, सरकार बच्चों को देखते हुए डोर-टु-डोर टीकाकरण भी शुरू कर सकती है।
लोगों के मन में बच्चों पर कोवाक्सिन के असर को लेकर भी संशय है। वे जानना चाहते हैं कि बच्चों पर कोवाक्सिन कितनी असरदार होगी? दरअसल, बच्चों पर इस वैक्सीन के कुल तीन ट्रायल किए गए। जांच में सामने आया कि यह टीका बच्चों पर 78 फीसदी तक कामयाब रहा, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इसके लिए मंजूरी दी। अहम बात यह है कि वयस्कों पर भी कोवाक्सिन का सक्सेस रेट 78 फीसदी तक पाया गया था।