कोरोना संक्रमण के मामले कम होने के साथ ही लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी है। सर्वे में शामिल 69 फीसदी लोगों ने माना है कि पिछले एक महीने के दौरान वे कहीं न कहीं ऐसी जगह अवश्य गये हैं जहां एक बंद भवन में कामकाज करना पड़ा है। इन जगहों में मॉल, अस्पताल, शॉपिंग काम्प्लेक्स या धार्मिक भवन रहे हैं। खुले आकाश की अपेक्षा एक भवन संक्रमण की दृष्टि से ज्यादा संवेदनशील जगह होती है। 73 फीसदी लोगों ने माना कि वे किसी खुली जगह पर गये हैं। ऐसी जगहों में आसपास के बाज़ार सबसे ज्यादा प्रमुख स्थान थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो लोग आपस में बातचीत कर रहे होते हैं और इस दौरान उन्होंने मास्क नहीं पहना होता है तो इससे संक्रमण फैलने की संभावना 90 फीसदी तक होती है, जिसे संक्रमण नहीं है, यदि उस व्यक्ति ने मास्क पहना हुआ है लेकिन जिसे संक्रमण हुआ है उसने मास्क नहीं पहना है तो असंक्रमित व्यक्ति के संक्रमिक होने की संभावना केवल 30 फीसदी रह जाती है। और यदि संक्रमित व्यक्ति और असंक्रमित व्यक्ति दोनों ने मास्क पहन रखा हो तो इस दौरान संक्रमण फैलने की संभावना न के बराबर ही रह जाती है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में कोरोना मामलों के नोडल अफसर डॉ. संदीप नैयर ने अमर उजाला से कहा कि कोरोना संक्रमण में भारी कमी आई है, यह सुखद संकेत है। लेकिन त्योहारों के सीजन में बाजारों-धार्मिक स्थलों पर लोगों की भीड़भाड़ बढ़ने और इस दौरान मास्क न पहनने और शारीरिक दूरी के नियमों का पालन न करने से संक्रमण बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है। यह कोरोना की एक नई लहर को दावत दे सकता है, इसलिए संक्रमण के प्रति लापरवाही बिलकुल सही नहीं है।