कोरोना का खतरा फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, वायरस के नए-नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं। कुछ वैरिएंट्स ऐसे भी हैं, जिन पर वैक्सीन उतनी कारगर नहीं है। हालांकि ऐसे वैरिएंट्स अभी बहुत कम हैं। डॉ. मोहसिन वली बताते हैं, कोरोना की तीसरी लहर बच्चों पर बड़ा असर डाल सकती है। इससे बचाव के लिए अभी से काम करना होगा। बच्चों को इस संक्रमण से बचाने के लिए सरकार को प्रशिक्षित डॉक्टरों एवं नर्सों को तैयार करना है। बच्चों में कोरोना के जो लक्षण दिख रहे हैं या तीसरी लहर में जिनकी संभावना व्यक्त की जा रही है, वह बहुत खतरनाक है। प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्स ही उन लक्षणों की पहचान कर सकते हैं। सबसे जरुरी बात ये है कि भारत में अभी मेडिकल सेक्टर पर भारी दबाव है। स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत सभी के सामने है।
तीसरी लहर के दौरान शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर क्रेच तैयार करने होंगे। उस समय तक देश के हर व्यक्ति को वैक्सीन लगेगी, ये संभव नहीं है। हो सकता है कि तीसरी लहर में संभलने का मौका ही न मिले। यही वजह है कि सरकार को अपनी सारी तैयारी अभी शुरू करनी होंगी। इससे पहले जो तैयारी की गई है, उसे अपडेट साधनों के साथ आगे बढ़ाते रहना है। कोरोना से बचाव के लिए हमारे पास जो भी वैक्सीन है, उसे लगवाना बहुत जरूरी है। इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को शुरू कर देना चाहिए। वजह, 18 साल से कम आयु के बच्चों को वैक्सीन नहीं लग रही है, इसलिए तीसरी लहर में उन्हें ज्यादा खतरा होगा। रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन शिंदे के अनुसार, सरकार को जल्द से जल्द बच्चों की वैक्सीन को लेकर ट्रॉयल शुरु कर देना चाहिए। अगर बच्चे अस्पताल जाएंगे तो उनके पैरेंट्स को भी साथ जाना होगा। अगर तब तक उन्हें वैक्सीन लग जाएगी तो वे सुरक्षित रह कर अपने बच्चे का इलाज करा सकते हैं। केंद्र सरकार को इस बाबत जल्द कदम उठाना होगा।
सुप्रीम कोर्ट भी हाल ही में केंद्र सरकार से कोरोना की तीसरी लहर की तैयारियों को लेकर सवाल पूछ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा, एक्सपर्ट बता रहे हैं कि कोविड की तीसरी लहर देश में आने वाली है। ये बच्चों को भी प्रभावित करेगी। बच्चे बीमार होंगे, तो जब वह अस्पताल जाएंगे, तो उनके अभिभावकों को भी साथ जाना होगा। ऐसे में आपकी क्या तैयारी है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर सामने दिख रही है। इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि तीसरी लहर से पहले वैक्सीनेशन के मौजूदा अभियान को तेजी से पूरा करने की जरूरत है। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले बच्चों की संख्या ज्यादा रही है। कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए बच्चों को भी मास्क पहनाएं। खेलने के लिए घर से बाहर न निकलने दें। सार्वजनिक स्थल पर जाने से गुरेज करें। परिवार का कोई सदस्य यदि कोरोना संक्रमित है तो बच्चों को उससे बिल्कुल दूर रखें।