एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा
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वैक्सीनेशन की स्थिति
अब तक लगभग 59 करोड़ लोगों को वैक्सीन की खुराकें दी जा चुकी हैं। अगस्त के अंत तक यह संख्या 65 करोड़ के लगभग हो सकती है। इसी प्रकार सितंबर तक 75-80 करोड़ हो जाएगा। इसके अलावा जिन्हें कोविड हो चुका है, उन्हें प्राकृतिक तौर पर सुरक्षा मिल गई है। इस तरह अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो भी इससे नुकसान कम होने की संभावना है।
बच्चों में सकारात्मकता दर
मार्च से जून के बीच किए गए एम्स के सीरो सर्वे में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सकारात्मकता दर 55.7 फीसदी और वयस्कों में 63.5 फीसदी थी। लेकिन हर्ड इम्यूनिटी के लिए अब 90 फीसदी से अधिक सकारात्मकता दर को ही विशेषज्ञ सुरक्षित मान रहे हैं। चूंकि, कोरोना की दोनों डोज लेने के बाद भी लोगों को कोरोना हो रहा है, वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमण से स्वयं को सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इस दौरान भी लोगों को पूरी सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
बच्चों को कैसे बचाएं
बच्चों के संपर्क में जो लोग भी आएं, उन्हें वैक्सीन की दोनो डो़ज लग चुकी हो। घर पर माता-पिता, घरेलू नौकर और स्कूल में टीचर-सपोर्टिंग स्टाफ पूरी तरह वैक्सीनेटेड होने चाहिए। स्कूल तभी खोलें जब आसपास के माहौल में कोरोना के मामले बहुत कम हो गए हैं। अगर दूर के इलाकों में कोरोना के मामले हैं तो सुरक्षा उपायों के साथ स्कूल खोले जा सकते हैं। लेकिन अगर संक्रमण बहुत ज्यादा है तो स्कूल खोलने से पूरी तरह दूरी रखनी चाहिए। जैसे ही बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध हो जाती है, बच्चों को प्राथमिकता के साथ वैक्सीन लगवाने की कोशिश की जानी चाहिए।
यह बात ध्यान रखने की है कि जिन छोटे-छोटे देशों में वैक्सीनेशन लगभग पूरा हो चुका है, इसके बाद भी वहां दोबारा संक्रमण हो रहा है। यानी कोरोना की समस्या खत्म नहीं हुई है, और हाल-फिलहाल में इसके खत्म होने की कोई संभावना भी नहीं है। ऐसे में भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें। जितनी जल्द संभव हो सके, बच्चों को वैक्सीन की डोज लगवाएं और हर संभव तरीके से मास्क लगाकर चलें और बच्चों को भी इसके लिए प्रेरित करें।