देश में H3N2 वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। महाराष्ट्र के अहमदनगर में एच3एन2 वायरस की चपेट में आने से एमबीबीएस छात्र की मौत हुई है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में सरकार ने इस संक्रमण के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर बुधवार को 16 मार्च से 26 मार्च तक आठवीं कक्षा तक के सभी स्कूलों में अवकाश की घोषणा की। महाराष्ट्र में अब तक H3N2 वायरस के 352 मामले दर्ज किए गए। अहमदनगर में H3N2 वायरस से जान गंवाने वाला छात्र कोरोना संक्रमित भी था। इससे पहले गुजरात में तीन लोगों की मौत हुई है।
10 लाख से ज्यादा चपेट में
दो दिन पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बयान जारी किया था कि इस साल जनवरी से लेकर अब तक चार हजार से ज्यादा संक्रमित रोगी सामने आए हैं। एक से नौ मार्च के बीच 400 से ज्यादा मरीज मिले हैं। वहीं, अलग-अलग इन्फ्लूएंजा से संक्रमित मरीजों को देखें तो 10 लाख से भी ज्यादा लोग अब तक इसकी चपेट में आए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही एच3एन2, इन्फ्लूएंजा परिवार का सदस्य है, पर इससे संक्रमितों में गंभीर रोग के मामले अधिक देखे जा रहे हैं, इस खतरे को देखते हुए सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
अब तक सात लोगों की मौत
इस वायरस से अब तक देश में सात से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, लेकिन अब तक स्वास्थ्य मंत्रालय ने कर्नाटक और हरियाणा में एक-एक मौत की पुष्टि की है। दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में एच3एन2 संक्रमण को लेकर 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड शुरू किया गया है। डॉक्टरों की एक टीम यहां तैनात की गई है। अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि केंद्र सरकार से मिले दिशानिर्देशों के आधार पर अलग से एक आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। यहां दवाओं से लेकर डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है।
महाराष्ट्र में इन्फ्लूएंजा से दो लोगों की मौत
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत ने बुधवार को विधानसभा को बताया कि राज्य में इन्फ्लूएंजा के कारण दो लोगों की मौत होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि इन लोगों में से एक 74 वर्षीय व्यक्ति की मौत एच3एन2 उप-प्रकार से हुई, जबकि दूसरा पीड़ित कोरोनो वायरस के साथ-साथ इन्फ्लूएंजा वायरस से संक्रमित था। वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि दो मृतकों में से एक 23 वर्षीय एमबीबीएस छात्र की मौत कोरोना वायरस और एच3एन2 के मिश्रित संक्रमण के कारण हुई। सावंत ने कहा कि महाराष्ट्र में इन्फ्लूएंजा संक्रमण के 361 मामले सामने आने के बाद राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट पर रखा गया है और अगले दो दिनों में दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। BMC के मुताबिक, मुंबई में 32 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 4 H3N2 और 28 H1N1 के मरीज हैं। इन सभी मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है।
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पिछले दिनों H3N2 वायरस के कई मरीज भारत में मिले, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ी है। H3N2 वायरस फिलहाल नियंत्रण में है। दरअसल, फ्लू एक श्वसन बीमारी होती है, जो इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होती है। इन्फ्लूएंजा वायरस चार प्रकार के होते हैं- ए, बी, सी और डी। इन्फ्लूएंजा ए, बी और सी मनुष्यों में फैलता है। हालांकि, केवल इन्फ्लूएंजा ए और बी प्रतिवर्ष मौसमी महामारी के तौर पर फैलता है।
अब इन्फ्लूएंजा ए वायरस दो प्रोटीनों के आधार पर दो अलग उपप्रकारों में विभाजित होता है। यह दो प्रोटीन हैं- हेमाग्लगुटिनिन (HA) और न्यूरोमिनिडेस (NA)। HA के 18 अलग अलग उपप्रकार हैं, जिन्हें H1 से H18 तक क्रमांकित किया गया है। वहीं NA के 11 अलग उपप्रकार हैं, जिन्हें N1 से N11 तक क्रमांकित किया गया है।सबसे पहली बार H3N2 वायरस इंसानों में 1968 में पाया गया। H3N2 के कारण होने वाले फ्लू के लक्षण अन्य मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण होने वाले लक्षणों के समान हैं।
H3N2 के लक्षण
इस फ्लू मे खांसी , नाक बहना, गला सूखना, सिर दर्द, शरीर में दर्द, बुखार, सर्दी लगना, डायरिया होना, उल्टी आदि की शिकायत हो सकती है।
इस फ्लू की कुछ लक्षण अन्य बीमारियों के समान ही है, जैसे सर्दी जुकाम होना। इसलिए केवल लक्षण देखकर पता लगा पाना मुश्किल होता है कि रोगी H3N2 वायरस के कारण फ्लू से पीड़ित है।
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लैप टेस्ट के जरिए इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि रोगी को फ्लू हुआ है या कोई अन्य बीमारी है। हालांकि अगर आप परंपरागत फ्लू सीजन में इस तरह के लक्षणों को महसूस कर रहे हैं तो विशेषज्ञ बिना लैब में जांच किए भी इसका इलाज फ्लू के तौर पर ही करेंगे।
किसे है फ्लू का अधिक जोखिम?
65 और उससे अधिक उम्र के लोगों, पांच साल से छोटे बच्चों और गर्भवती को H3N2 वायरस के कारण होने वाले फ्लू का जोखिम अधिक होता है। इसके अलावा जो लोग अस्थमा, डायबिटीज और हृदय रोग से पीड़ित हैं या जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर हैं, वह भी फ्लू से जल्दी संक्रमित हो सकते हैं।