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Tehreek-e-Hurriyat: तहरीक-ए-हुर्रियत पर लगा प्रतिबंध, कश्मीर में इस्लामिक शासन लागू करने की रची थी साजिश

Sun, 31 Dec 2023 03:20 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमित शाह ने लिखा, 'पीएम नरेंद्र मोदी की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति के तहत कोई भी व्यक्ति या संगठन अगर भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाएगा तो उसे नेस्तानाबूत कर दिया जाएगा।'
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तहरीक ए हुर्रियत के नेता अशरफ सेहराई और सैयद गिलानी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सरकार ने जम्मू कश्मीर के संगठन तहरीक ए हुर्रियत पर प्रतिबंध लगा दिया है। यूएपीए (Unlawful Activities prevention act (UAPA)) कानून के तहत यह कार्रवाई की गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने यह जानकारी दी। गृहमंत्री ने बताया कि यह संगठन गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल है और जम्मू कश्मीर को भारत से अलग करके राज्य में इस्लामिक शासन स्थापित करना चाहता है। तहरीक ए हुर्रियत का गठन भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैलाने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया गया था। 
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गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जानकारी दी
गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर साझा किए एक पोस्ट में बताया कि 'तहरीक ए हुर्रियत, जम्मू कश्मीर को यूएपीए के तहत गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति के तहत कोई भी व्यक्ति या संगठन अगर भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाएगा तो उसे नेस्तानाबूत कर दिया जाएगा।' सरकार ने इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि तहरीक ए हुर्रियत सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी करने और आतंकी गतिविधियों के लिए फंड इकट्ठा करने में लिप्त रहा है। साथ ही यह संगठन देश के संवैधानिक संस्थानों के प्रति अपमान का भाव रखता है। इसके सदस्य सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों को श्रद्धांजलि देते हैं। नोटिफिकेशन में ये भी लिखा गया है कि यह संगठन लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं रखता है।
 

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने किया था गठन
जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने साल 2004 में तहरीक ए हुर्रियत का गठन किया था। गिलानी के बाद तहरीक ए हुर्रियत के अध्यक्ष मुहम्मद अशरफ सेहराई थे, जिनका भी साल 2021 में निधन हो गया। यह संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का सहयोगी संगठन है। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस जम्मू कश्मीर के 26 संगठनों का समूह है, जिसका गठन 1993 में किया गया था। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में कई ऐसे संगठन शामिल हैं, जो पाकिस्तान समर्थक और अलगाववादी माने जाते हैं। इनमें जमात ए इस्लामी, जेकेएलएफ और दुखतरान ए मिल्लत आदि का नाम शामिल है। साल 2005 में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस दो धड़ों में बंट गया। इसके नरमपंथी गुट का नेतृत्व मीरवाइज उमर फारुख को मिला। वहीं चरमपंथी गुट का नेतृत्व सैयद अली शाह गिलानी ने किया। गिलानी के निधन के बाद हुर्रियत कन्फ्रेंस का नेतृत्व मसर्रत आलम भट के पास आ गया। भट को भारत विरोधी और पाकिस्तान के समर्थन में एजेंडा चलाने के लिए जाना जाता है। भट फिलहाल जेल में है और उसकी पार्टी 'मुस्लिम लीग ऑफ जम्मू कश्मीर' को 27 दिसंबर को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया गया था। 
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