गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने अपने रुख में बदलाव लाते हुए वार्ता की राह पर आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। अब तक आंदोलन के जरिए अलग गोरखालैंड राज्य की मांग पर अड़े गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष विमल गुरुंग ने कहा है कि गोरखा मामले का समाधान बातचीत से ही संभव है। सभी राजनीतिक आंदोलनों की तरह हमें इस आंदोलन को भी पूरी निष्ठा के साथ समय देना होगा।
उन्होंने कहा कि वे किसी से भी बातचीत को तैयार हैं, चाहे राज्य की सरकार ही क्यों न हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की ममता सरकार को खुले दिमाग से बातचीत करनी होगी। प्रदेश सरकार की नीयत गोरखा मामले पर संदेह के घेरे में रहती है।
प्रदेश सरकार ने तमाम बोर्ड और अन्य कवायदों के जरिए गोरखाओं को भी बांटने की कोशिश की है, मगर देशभर के गोरखा अपनी पहचान के लिए एकजुट हैं। पिछले जून के महीने में दार्जिलिंग में जो कुछ भी हुआ वह पश्चिम बंगाल सरकार की दिशाहीनता का नतीजा है।