डॉ. चक्रवर्ती ने अमर उजाला को बताया कि पिछले 2 साल से उनकी टीम डीएनए और आरएनए के म्यूटेशन पर काम कर रही थी। इस वर्ष की शुरुआत में जब कोविड-19 ने एक के बाद एक पूरी दुनिया के देशों में फैलना शुरू किया तो उन्होंने अपना फोकस इसकी टेस्ट किट विकसित करने पर कर लिया। जिस तकनीक से यह टेस्ट होगा उसी तकनीक पर अमेरिका के दो संस्थानों - एमआईटी और कैलिफोर्निया स्थित बर्कले इंस्टीट्यूट ने भी टेस्ट किट तैयार कर रहे हैं।
हर पट्टी पर होंगी दो रेखाएं
वैज्ञानिकों के मुताबिक हर स्ट्रिप पर एक कंट्रोल लाइन होगी और दूसरी टेस्ट लाइन। ओरल स्वैब के पट्टी के संपर्क में आते ही यदि कंट्रोल लाइन रंग बदल लेती है तो इसका अर्थ होगा पट्टी ठीक से काम कर रही है। और टेस्ट लाइन के रंग बदलने का अर्थ होगा कि मरीज कोरोना पॉजिटिव है।
सभी टेस्ट जासूसों के नाम पर
चूंकि इस टेस्ट को तैयार करने वाले दोनों वैज्ञानिक बंगाली है। उन्होंने बंगाल के जाने-माने साहित्यकार और फिल्मकार सत्यजीत रे की कृतियों के प्रसिद्ध जासूस फेलूदा के नाम पर रखा है। चक्रवर्ती कहते हैं क्योंकि उनका टेस्ट फेलू दा की तरह ही चुपचाप और बहुत तेजी से काम करता है इसलिए इसका यह नाम रखा। मजे की बात यह है कि एमआईटी के टेस्ट का नाम अगाथा क्रिस्टी के प्रसिद्ध जासूस शरलॉक होम्स के नाम पर शरलॉक रखा गया है तो बर्कले ने अपने टेस्ट किट का नाम डिटेक्टर रखा है।