केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे गैर-आवंटित मद से मिलने वाली बिजली अपने राज्य के उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं। इसे पावर एक्सचेंज में बेच कर उपभोक्ताओं की सप्लाई में कटौती न करें। गैर-आवंटित मद में केंद्र से ऊर्जा संयंत्रों में बनी 15 प्रतिशत बिजली रखी जाती है, इसे केंद्र सरकार बिजली की मांग बढ़ने पर जरूरतमंद राज्यों के उपभोक्ताओं को प्रदान करती है।
मंत्रालय के अनुसार कुछ राज्य अपने यहां बिजली कटौती कर रहे हैं, उपभोक्ताओं तक बिजली नहीं पहुंचा रहे। दूसरी ओर वे ऊंची दरों पर पावर एक्सचेंज में बिजली बेच भी रहे हैं। 11 अक्तूबर को जारी इन निर्देशों में दिल्ली सहित सभी राज्यों कहा गया है कि मांग बढ़ने पर वे गैर-आवंटित मद से उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली, पंजाब, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बिजली की कमी के संकट की आशंका जताते हुए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की थी। राजस्थान और पंजाब सहित कई राज्यों में घोषित और यूपी सहित कई अन्य राज्यों में अघोषित कटौती होने की शिकायतें उपभोक्ता कर रहे थे।
ज्यादा बिजली है तो सूचित करें, वरना कार्रवाई
मंत्रालय ने कडे़ शब्दों में कहा कि अगर किसी राज्य के पास गैर-आवंटित कोटे या सामान्य कोटे से भी सरप्लस बिजली पहुंच रही है तो वे समय पर इसकी सूचना दें। इससे उनकी सप्लाई घटाकर सरप्लस बिजली जरूरतमंद राज्यों को पहुंचाई जा सकेगी। अगर कोई राज्य पावर एक्सचेंज में बिजली बेचता पाया गया, या सरप्लस बिजली की सूचना नहीं देता है तो उसे गैर-आवंटित कोटे से सप्लाई अस्थाई रूप से घटाई या पूरी तरह रोकी जा सकती है। उसकी बिजली दूसरे जरूरतमंद राज्य को दी जाएगी।
जितनी हो दिल्ली डिस्कॉम को बिजली पहुंचाएं एनटीपीसी व डीवीसी
ऊर्जा मंत्रालय ने एनटीपीसी और डीवीसी को भी निर्देश दिए हैं कि वे दिल्ली को मांग के अनुरूप बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें। वितरण कंपनियों को पावर पर्चेस एग्रीमेंट (पीपीए) के तहत बिजली सप्लाई होती रहे। दोनों कॉर्पोरेशन चाहें तो दिल्ली की डिस्कॉम को घोषित क्षमता की सप्लाई कोयला आधारित पावर स्टेशनों से ही करें। गैस आधारित ऊर्जा संयंत्रों से भी सप्लाई की जा सकती है, इसके लिए सभी संभव स्रोतों से संयंत्रों को गैस पहुंचाएं।
दिल्ली ने जितनी मांगी, उतनी बिजली दी
ऊर्जा मंत्रालय ने पांच सितंबर से 10 सितंबर तक दिल्ली में बिजली की मांग और सप्लाई के आंकड़े भी जारी किए। इसके अनुसार दोनों में संतुलन बना हुआ है। 25 सितंबर को 9.45 करोड़ यूनिट मांग के बदले में 9.45 करोड़ बिजली मुहैया हुई तो पांच अक्तूबर को मांग 12.4 करोड़ यूनिट पहुंचने पर इतनी ही बिजली दी गई। पीक डिमांड में भी यह संतुलन 100 प्रतिशत बना रहा।