बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने पत्रकार तरुण तेजपाल को 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ गोवा सरकार की अपील पर सुनवाई मंगलवार को स्थगित कर दी।
मामले में प्रत्यक्ष और डिजिटल दोनों तरह की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अनुरोध दाखिल होने तक सुनवाई स्थगित की गई है। अभी तक मामले में ऑनलाइन सुनवाई हो रही थी। मंगलवार को पहली बार मामले में प्रत्यक्ष सुनवाई हुई। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 सितंबर की तारीख तय की है।
सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता देवीदास पनगाम और तेजपाल के वकील ने न्यायमूर्ति एम एस सोनक और न्यायमूर्ति एम एस जवालकर की पीठ से समय मांगा। उन्होंने मामले में मिश्रित सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अभी तक अपने आवेदन दाखिल नहीं किए हैं। पनगाम ने पीठ से मामले में सुनवाई दो सप्ताह और स्थगित करने का अनुरोध किया था, ताकि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष आवेदन दाखिल किया जा सके।
गोवा सरकार की ओर से भारत के सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने उस समय बंद कमरे में सुनवाई की तेजपाल की अपील का विरोध करते हुए कहा था, देश को यह जानने का हक है कि संस्था ने पीड़िता के मामले को किस तरह लिया।
गौरतलब है कि एक सत्र अदालत ने इस साल 21 मई को तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तेजपाल को यौन उत्पीड़न के एक मामले में बरी कर दिया था। तेजपाल पर नवंबर 2013 में गोवा के पांच-सितारा होटल की लिफ्ट में उस समय की अपनी एक सहकर्मी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप था। दोनों वहां एक कार्यक्रम में शामिल हो रहे थे।