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Budget 2024: कैसी होगी 'मोदी बजट' की पहली चाय? कड़वे घूंट में दिखेगा अमृतकाल का विजन!

अमित शर्मा
Updated Thu, 11 Jul 2024 11:24 PM IST

सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद सत्र की शुरुआत में ही इस बात का संकेत दिया था कि आने वाले बजट में देश के शताब्दी वर्ष तक की उपलब्धियों का खाका खींचा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं अपने इस तीसरे कार्यकाल में देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की बात कहते रहे हैं।
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मोदी सरकार कर रही तैयारी। - फोटो : अमर उजाला।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद सत्र की शुरुआत में ही इस बात का संकेत दिया था कि आने वाले बजट में देश के शताब्दी वर्ष तक की उपलब्धियों का खाका खींचा जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं अपने इस तीसरे कार्यकाल में देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की बात कहते रहे हैं। वे आजादी के शताब्दी वर्ष यानी 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने की बात भी करते रहे थे। ऐसे में माना यही जा रहा है कि केंद्र सरकार आज़ादी के 75वें वर्ष में देश को विकसित देश बनाने के लिए बजट में अहम कदमों की घोषणा की जा सकती है। 


क्या होंगे उपाय? 

केंद्र सरकार ने अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए मूलभूत ढांचे में निवेश को अपना मूलमंत्र बना रखा है। रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने और प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में मांग को बनाए रखने के लिए सरकार एक बार फिर मूलभूत ढांचे में निवेश को अपनी प्राथमिकता बनाए रख सकती है। इसके साथ ही विदेशी निवेश और निजी निवेशकों के द्वारा सौर ऊर्जा, वाहनों के निर्माण, मोबाइल उद्योग सहित प्रमुख क्षेत्रों में निवेश करवा कर वह देश की अर्थव्यवस्था को तेज गति देने की कोशिश कर सकती है। अहम क्षेत्रों में निवेश करने पर औद्योगिक इकाइयों को विशेष छूट दिए जाने का विकल्प भी आजमाया जा सकता है।


राजनीतिक स्थिति का असर

केंद्र सरकार की राजनीतिक स्थिति पिछली बार की तरह संसद में उतनी मजबूत नहीं रह गई है। अब तक अनुमान यही जताया जा रहा था कि बजट में कठोर कदम उठाने पर उसे सहयोगी दलों का दबाव झेलना पड़ सकता है। अगले डेढ़ साल के बीच भाजपा को छह प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव का सामना भी करना है। लेकिन सरकार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि देश की अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए वह कड़े कदम उठाना जारी रखेगी।  


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट निर्माण की प्रक्रिया में अब तक लगभग हर क्षेत्रों के प्रमुख स्टेक होल्डर्स से मुलाकात कर चुकी हैं। कुछ प्रतिनिधियों ने आज की महंगाई के दौर से उपभोक्ताओं के हाथों में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा छोड़ने के उद्देश्य से आयकर सीमा बढाने की मांग की थी। लेकिन जिस तरह सरकार पर आर्थिक दबाव हैं, माना यही जा रहा है कि आयकर में छूट मिलने के कोई आसार नहीं हैं। हालांकि, बजट में गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष योजनाओं में खर्च बढ़ाया जा सकता है। 

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