सरकार के आलोचकों को देशद्रोही बता जेलों में डाल रहे : नरीमन
देशद्रोह कानून खत्म होना चाहिए, सरकार की आलोचना करने वालों को देशद्रोह कानून में कैद किया जा रहा है, यह कहना है सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रोहिंटन नरीमन का। उन्होंने चिंता जताई कि दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से युवा नागरिकों, विद्यार्थियों, हास्य कलाकारों आदि को केंद्र सरकार के खिलाफ कुछ कहने पर जेल में डाला जा रहा है।
पूर्व जस्टिस नरीमन ने कहा कि देशद्रोह कानून उपनिवेशवादी दौर का है, जिसकी हमारे संविधान में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। दूसरी ओर नफरती भाषण देने वालों की संख्या बढ़ रही है, वे एक पूरे समुदाय के नरसंहार के लिए लोगों से कह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति ने भी नफरती भाषणों को अपराध और संविधान के खिलाफ बताया है, जो अच्छी बात है। जस्टिस नरीमन की यह टिप्पणी एक धर्मगुरु यति नरसिंहानंद के संदर्भ में है, जिसने हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में मुसलमानों के खिलाफ हथियार उठाने व नरसंहार के लिए लोगों से कहा था।
ईवीएम इस्तेमाल को चुनौती वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट ने जन प्रतिनिधित्व कानून के उस प्रावधान को चुनौती वाली जनहित याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करने के लिए सहमत हो गया, जिसमें मतपत्र से चुनाव के बजाय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
वकील एमएल शर्मा ने ईवीएम की सांविधानिक वैधता को चुनौती दी है। चीफ जस्टिस एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता वकील ने अपनी याचिका को सूचीबद्ध करने की गुहार लगाई और कहा कि 10 फरवरी से यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव को देखते हुए इस पर सुनवाई जरूरी है।