पहली भारत-यूरोपीय संघ(ईयू) ट्रैक 1.5 वार्ता आठ फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित होगी। इस दौरान मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएएस) तकनीक से जुड़े वर्तमान और उभरते खतरों को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश की जाएगी। साथ ही यूरोपीय संघ और भारत के प्रतिभागी क्षेत्रों में यूएएस खतरों से निपटने के लिए नियामक, सामरिक और खोजी प्रतिक्रियाओं के संबंध में चर्चा होने की संभावनाएं हैं।
इस वार्ता का उद्देश्य खास तौर पर उपभोक्ता-ग्रेड यूएएस तकनीक से जुड़े वर्तमान और उभरते खतरों की सीमा को बेहतर ढंग से समझना और चरमपंथी समूहों द्वारा इसके उपयोग को रोकना है। इस वार्ता के बारे में भारत में ईयू मिशन ने भी जानकारी दी है। ईयू मिशन ने बताया कि वार्ता के दौरान यूरोपीय संघ और भारत के प्रतिनिधी यूएएस खतरों से निपटने के लिए नियामक और सामरिक प्रक्रियाओं को लेकर रणनीति बनाएंगे।
यह बैठक यूरोपीय संघ और भारत के बीच जारी आतंकवाद रोधी गतिविधियों की एक श्रृंखला का हिस्सा है। भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि सुरक्षा और आतंकवादी खतरे लगातार मिश्रित प्रकृति के होते जा रहे हैं। वाणिज्यिक ड्रोन का इस्तेमाल इसका एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यदि एक ड्रोन पिज्जा या बिरयानी ले जा सकता है और उड़ा सकता है, तो साफ तौर से उनका उपयोग हथियार या विस्फोटकले जाने के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे में बहुत तेजी से विकसित हो रहे इस क्षेत्र में ड्रोन के खतरों का मुकाबला करने के लिए यूरोपीय यूनियन और भारत के बीच जानकारी और अनुभव की साझेदारी प्रासंगिक और अत्यंत महत्वपूर्ण है।