Piyush Goyal and Narendra singh Tomar
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आंदोलनकारी किसान संगठनों से सुलह करने को लेकर केंद्र सरकार ने अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी इस मामले को लेकर एक बार फिर से एक्टिव हो गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और वाणिज्य व रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ उन्होंने मंत्रणा शुरू कर दी है।
विश्वस्त सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि किसान संगठन सरकार के साथ आठवें दौर की बातचीत के दौरान अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर ही चर्चा करेंगे। इसे लेकर सरकार चिंतित है कि इस बैठक में अगर कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता है तो सरकार के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। बीच का रास्ता निकालने और किसी तरह आंदोलन खत्म कराने को लेकर एक बार फिर गृहमंत्री अमित शाह एक्टिव हो गए हैं। सातवें दौर की चर्चा के बाद से ही रोज गृहमंत्री शाह दोनों केंद्रीय मंत्रियों के साथ चर्चा कर रहे हैं।
सूत्र के मुताबिक तीन जनवरी को पहले तीनों केंद्रीय मंत्रियों की कृषि मंत्रालय के अफसरों के साथ बैठक होगी। बैठक में अफसर दोनों प्रमुख मांगों के संभावित फार्मूलों पर अपना प्रेजेंटेशन देंगे। दोपहर में फिर से तीनों केंद्रीय मंत्रियों के बीच चर्चा होगी। इसके बाद देर शाम को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के घर या आफिस में मंत्रियों की बैठक तय की गई है। इस बैठक में शाह आगे की रणनीति को लेकर मंत्रियों से चर्चा करेंगे। मंत्रियों की बैठक के बाद कृषि मंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय को इस बैठक में लिए गए निर्णय से अवगत करवाएंगे। फिर सभी मंत्री चार जनवरी को किसान संगठनों के साथ बैठक करेंगे।
गौरतलब है कि किसान संगठनों के भारत बंद के आयोजन के बाद और पांचवे दौर की वार्ता से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से पूसा इंस्टीट्यूट में मुलाकात की थी। इस बैठक में भी कोई नतीजा नहीं निकल सका था। बैठक में किसान संगठन नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग पर अड़े रहे, लेकिन सरकार का कहना था कि कानूनों को रद्द करना संभव नहीं है, इनमें संशोधन किए जा सकते हैं।