मेधा पाटकर ने अमर उजाला से कहा कि पूरी दुनिया में कुल श्रम आवश्यकता का दो-तिहाई केवल महिलाओं के द्वारा पूरा किया जाता है। किसानों के रूप में भी महिलाओं की भूमिका पुरुषों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। इस किसान आन्दोलन में भी महिला किसान नेताओं-कार्यकर्ताओं ने बेहद अहम भूमिका निभाई है और लाखों महिलाएं शुरुआत से लेकर अभी तक इस आन्दोलन से जुड़ी हुई हैं। महिला श्रमिकों-किसानों की पर्याप्त सक्रिय भागीदारी के बिना कोई भी आन्दोलन सफल नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि ऐसे में आंदोलन सहित सभी स्थलों पर अगर महिलाओं के सम्मान-सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकी तो आन्दोलन अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता। वे किसान मोर्चे से दी गई जिम्मेदारी को बहुत गंभीरता से स्वीकार करती हैं और इस मामले की जांच कराने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने में जो भी संभव हो सकेगा, वह करेंगी।
वहीं, किसान नेता प्रतिभा शिंदे ने कहा है कि महिलाओं के साथ इस तरह की घटनाएं हमारे समाज का कलंकित हिस्सा हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि समाज का यह हिस्सा आन्दोलन तक भी पहुंच गया। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा कमेटी इस बात को तय करेगी कि आंदोलन स्थल पर इस तरह की कोई हरकत दोबारा न हो, इसके लिए हर आंदोलन स्थल पर विशेष सुरक्षा कमेटियां बनाने के बारे में विचार किया जा रहा है। ऐसी कमेटियों को गठित करने पर भी विचार किया जा रहा है जहां कोई परेशानी होने पर महिलाएं अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी।
मेधा पाटकर महिला सुरक्षा कमेटी की अध्यक्ष होंगी। उनके आलावा प्रतिभा शिन्दे, जगमती संगवान, अमरजीत कौर, कविता कृष्णन, ऋतु कौशिक, पूनम कौशिक और ऐनी राजा को इसका सदस्य बनाया गया है। कमेटी जल्द ही ऑनलाइन बैठक कर अपनी अगली रणनीति तय करेगी।