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किसान आंदोलन: जिद और शक्ति परीक्षण के बीच आठवें दौर की वार्ता आज

Fri, 08 Jan 2021 02:34 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर किसानों का ट्रैक्टर मार्च - फोटो : अमर उजाला
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कृषि कानूनों पर जारी रस्साकसी के बीच सरकार और किसान संगठन शुक्रवार को आठवीं बार वार्ता की मेज पर होंगे। दोनों पक्षों की जिद और किसान संगठनों के शक्ति परीक्षण के बीच होने वाले इस वार्ता में नतीजा निकलने की उम्मीद कम है। सरकार सकारात्मक रुख का संदेश देने के लिए इस वार्ता में किसान संगठनों के समक्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बातचीत का प्रस्ताव रखेगी।

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वार्ता से पहले दोनों पक्षों के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। दोनों पक्षों की निगाहें सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है। किसान संगठनों ने बृहस्पतिवार को ट्रैक्टर रैली निकाल कर शक्ति प्रदर्शन किया। इसके जरिए किसान संगठनों ने एमएसपी पर कानूनी गारंटी और तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मांग पर डटे रहने का संकेत दिया। वहीं, सरकार की ओर से भी बार-बार संदेश दिया जा रहा है कि वह कानून वापसी की मांग को स्वीकार नहीं करेगी। इसके बदले वह इन कानूनों के एक-एक प्रावधान पर चर्चा करने के लिए तैयार है।

किसान संगठन कानूनी की वापसी की मांग पर अडे़
सरकार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले संदेश देना चाहती है कि वह तो वार्ता के लिए तैयार है, मगर किसान संगठन विवाद का हल निकालने के लिए तैयार नहीं है। ऐसा इसलिए कि सुप्रीम कोर्ट भी बार-बार वार्ता के माध्यम से विवाद का हल निकालने की बात कर रहा है। ऐसे में शुक्रवार की वार्ता में हल निकालने का संदेश देने के लिए सरकार तीनों कानूनों की जगह एमएसपी पर बातचीत की शुरुआत करने का प्रस्ताव देगी। जबकि किसान संगठनों का संदेश साफ है कि वह भी वार्ता में कानूनों की वापसी की मांग पर ही अडिग रहेंगे।
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सुप्रीम कोर्ट के रुख के मुताबिक ही भावी रणनीति बनाना चाहते हैं दोनों पक्ष
सरकार ही नहीं किसान संगठनों की निगाहें भी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर है। दोनों ही पक्ष शीर्ष अदालत के रुख के अनुरूप ही भविष्य की रणनीति बनाना चाहते हैं। ऐसे में आगामी होने वाली बैठक महज प्रतीकात्मक रह सकती है।

आठवें दौर की वार्ता शुक्रवार अपराह्न दो बजे विज्ञान भवन में होगी। इससे पहले चार जनवरी को हुई बैठक के बेनतीजा रहने के बाद यह बैठक अहम है। सरकार ने 30 दिसंबर को छठे दौर की वार्ता में किसानों की बिजली सब्सिडी और पराली जलाने संबंधी दो मांगों को मान लिया था। इससे पहले की किसी वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली थी।

किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि संयुक्त किसान मोर्चा को तीन कृषि कानूनों से राज्यों को बाहर निकलने की अनुमति देने का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। हम इन कानूनों रद्द किए जाने और हमारी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।

यदि यह (प्रस्ताव) सही बात है तो यह सरकार की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति है।’ भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहण) प्रमुख जोगिंदर सिंह ने भी सरकार से इस प्रकार का कोई प्रस्ताव मिलने की बात से इनकार किया है। स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने फेसबुक के जरिए संवाद के दौरान सरकार पर ‘अफवाह फैलाने’ का आरोप लगाया।

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